बिजली कर्मचारियों की चेतावनी: उत्पीड़न नहीं रुका तो होगा बड़ा आंदोलन, निजीकरण पर भी कड़ा विरोध

मथुरा। प्रदेश के बिजली कर्मचारियों ने ऊर्जा निगम प्रबंधन के खिलाफ तीखा रुख अपनाते हुए कड़ी चेतावनी दी है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि भीषण गर्मी में कर्मचारी दिन-रात मेहनत कर उपभोक्ताओं और किसानों को निर्बाध बिजली आपूर्ति दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके साथ दमन और उत्पीड़न की कार्यवाहियां की जा रही हैं, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है।
समिति ने स्पष्ट किया कि यदि कर्मचारियों पर हो रही दमनात्मक कार्रवाइयां तत्काल प्रभाव से वापस नहीं ली गईं, तो प्रदेश के ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशांति की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
पदाधिकारियों ने पनकी और जवाहरपुर ताप विद्युत गृहों के संचालन एवं अनुरक्षण कार्य को आउटसोर्स करने के निर्णय का भी विरोध किया। उनका कहना है कि जनता के धन से निर्मित ऊर्जा परिसंपत्तियों को किसी भी कीमत पर निजी हाथों में नहीं जाने दिया जाएगा।
संघर्ष समिति के अनुसार पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के खिलाफ पिछले 517 दिनों से प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन जारी है। चेतावनी दी गई है कि जिस दिन निजीकरण का टेंडर जारी होगा, उसी दिन सभी बिजली कर्मचारी सामूहिक “जेल भरो आंदोलन” शुरू करेंगे।
समिति ने आरोप लगाया कि मार्च 2023 के आंदोलन के दौरान हुए उत्पीड़न के मामलों को अब तक वापस नहीं लिया गया है जबकि ऊर्जा मंत्री के निर्देश और समझौते में ऐसा आश्वासन दिया गया था। इसी के विरोध में 16 अप्रैल से प्रदेशव्यापी जन-जागरण अभियान चलाया जा रहा है।
इसी अभियान के तहत मथुरा में आयोजित सभाओं को केंद्रीय पदाधिकारी जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय और मोहम्मद वसीम ने संबोधित किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उत्पीड़न की सभी कार्रवाइयां जल्द समाप्त नहीं हुईं, तो व्यापक स्तर पर आंदोलन तेज किया जाएगा और निजीकरण का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा।