मथुरा में गेहूं क्रय केंद्रों पर डीएम की औचक छापेमारी; बोले- ‘किसानों को असुविधा हुई तो खैर नहीं’
48 घंटे में भुगतान, अन्यथा होगी सख्त कार्रवाई, किसानों से की सीधी बात खिलाया गुड
मथुरा। गेहूं खरीद सत्र के दौरान किसानों को किसी भी प्रकार की समस्या न हो इसे सुनिश्चित करने के लिए मथुरा के जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने राया मंडी का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने खाद्य विभाग और भारतीय खाद्य निगम के तीन क्रय केंद्रों की व्यवस्थाओं को परखा। कड़े तेवर दिखाते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि गेहूं खरीद में बिचौलियों का दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भुगतान में देरी करने वाले अधिकारियों पर सीधी कार्रवाई होगी।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में निर्देश दिए कि किसानों को उनके गेहूं का भुगतान 48 घंटे के भीतर सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भुगतान में लापरवाही बरती गई, तो संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शासन की मंशा है कि प्रत्येक किसान को ₹2585 के न्यूनतम समर्थन मूल्य का पूरा लाभ मिले।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने क्रय केंद्रों पर किसानों के लिए पेयजल, छाया, पंखे, कूलर और बैठने की उचित व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
इलेक्ट्रॉनिक कांटों की जांच की गई और निर्देश दिया गया कि तौल प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ हो। बिचौलियों पर पैनी नजर रखने को कहा गया।
नमी मापक यंत्रों की जांच की गई। खरीदे जा रहे गेहूं की गुणवत्ता और नमी के मानकों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिए।
इसके अलावा उन्होंने बोरियों के रखरखाव और बारिश से बचाव के लिए तिरपाल की व्यवस्था दुरुस्त रखने को कहा गया। मंडी निरीक्षक को मंडी परिसर में साफ-सफाई की उत्कृष्ट व्यवस्था बनाए रखने के आदेश दिए।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने केवल फाइलों की जांच नहीं की, बल्कि वहां मौजूद किसानों से सीधा संवाद भी किया। उन्होंने किसानों की समस्याएं सुनीं और उन्हें केंद्र पर ही ‘गुड़’ खिलाकर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने किसानों को सरकारी क्रय केंद्रों पर ही गेहूं बेचने के लिए प्रोत्साहित किया।
जिलाधिकारी ने कहा कि “किसानों का हित हमारे लिए सर्वोपरि है। शासन की मंशा है कि किसान को उनकी उपज का सही दाम मिले और उन्हें मंडी में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।