मनीष कुमार शर्मा
गोवर्धन। कहावत है कि पुलिस चाहे तो रस्सी को सांप और सांप को रस्सी बना दे और ये कहावत जनपद के गोवर्धन थाना पुलिस पर सटीक बैठ रही है। आंकड़े बाजी में माहिर गोवर्धन पुलिस भले ही धरातल पर अपराधियों पर नियंत्रण न लगा पा रही हो मगर आंकड़े बाजी में वो पूरी तरह निपुड है। वाहन चोरों के आगे बेबस गोवर्धन थाना पुलिस पीड़ित की रिपोर्ट लिखने से लेकर चोरी गए माल की कीमत का आंकलन भी अपने गुना भाग के अनुसार ही करती है। लाखो के चोरी गए माल को हजारों की राशि का दर्शा कर पुलिस रिपोर्ट की प्रवृति को ही बदल देती है।
बता दे की वर्तमान में गोवर्धन में वाहन चोर गिरोह पूरी तरह सक्रिय है। थाना पुलिस की कार्यशैली के चलते वाहन चोरों के हौसले इस कदर बुलंद है कि आए वाहन चोरी होना आम बात हो चली है। चोर पुलिस को नई नई चुनौती दे रहे है परन्तु पुलिस है कि आंकड़ों को सेट करने पर ध्यान दे रही है।
अब तक केवल मोटर साईकिल चोरी करने में जुटे वाहन चोर अब बड़े वाहनों पर भी हाथ साफ कर रहे है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार बीते 20 दिनों में वाहन चोरों ने गोवर्धन से 6 मोटर साइकिल सहित 4 बड़े वाहनों को कागजी में मुस्तैद गोवर्धन थाने की पुलिस को चकमा देकर चुरा लिया और पुलिस कुछ न कर सकी।
इन 4 वाहनों में दो ट्रैक्टर, एक ट्रॉली, एक छोटा हाथी व एक ऑटो टेंपो है। पुलिस की नजर में चोरी गए छोटा हाथी की कीमत 20 हजार रुपए ऑटो रिक्शा की कीमत एक लाख रुपए, चोरी गए मैसी ट्रैक्टर की कीमत 2 लाख रुपए तो 4 माह पुराने ट्रैक्टर ट्रॉली की कीमत महज 15 हजार रुपए ही आंकी गई है। बता दे की रिपोर्ट लिखने के वक्त दर्ज रिपोर्ट में पुलिस को चोरी गए माल की अनुमानित कीमत भरनी पड़ती है। बस यही पुलिस के आंकड़ों का खेल शुरू हो जाता है। चोरी गई मोटरसाइकिल की कीमत पुलिस के आंकलन के मुताबिक महज 10 से 20 हजार के बीच होती है तो वही 3 पहिया और चार पहिया वाहन की कीमत भी पुलिस अपने मन मुताबिक हजारों में दर्ज करती है।
अभी 10 अगस्त को कस्बा के सौंख रोड बायपास से चोरी गए नए मैसी ट्रैक्टर व ट्रॉली की कीमत में भी पुलिस ने खेल कर दिया। तकरीबन 7:50 लाख के माल को रिपोर्ट में दर्ज अनुमानित कीमत में थाना पुलिस ने 15 हजार रुपए का आंकलन किया है। जबकि ट्रैक्टर ट्रॉली महज 4 माह पुराना है। बीमा में उक्त चोरी गए ट्रैक्टर की कीमत कंपनी द्वारा 6 लाख 46 हजार मान रही है मगर पुलिस के आंकलन में मात्र 15 हजार है।
पुलिस विभाग के जानकारों के मुताबिक चोरी गए माल की उचित कीमत अंकित करने पर पुलिस को उसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों तक भेजनी पड़ती है। 3 लाख से अधिक की कीमत के माल की चोरी होने पर ये गंभीर मुकदमों की श्रेणी में आ जाता है। तथा ऐसे मुकदमों की जानकारी लखनऊ तक भेजनी पड़ती है। रिपोर्ट की गंभीरता को दबाने के लिए पुलिस अनुमानित कीमत मैं सही रिपोर्ट नही अंकित करती। नए पुलिस कप्तान को थाना पुलिस की कार्यशैली को सुधारने के लिए ध्यान देना होगा।
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