संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम और लोकसभा सीटों को 850 तक बढ़ाने वाले 131वें संविधान संशोधन विधेयक पर चर्चा शुरू
नई दिल्ली । संसद के विशेष अधिवेशन के पहले दिन सरकार ने ऐतिहासिक ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन और लोकसभा की सीटों को बढ़ाकर 850 करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। प्रस्तावित ‘संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026’ के माध्यम से अनुच्छेद 81 और 82 में बदलाव का प्रस्ताव है, जिससे 2026 से पहले की जनगणना के आधार पर नए परिसीमन का मार्ग प्रशस्त होगा। सरकार का तर्क है कि बढ़ती जनसंख्या और महिला आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सदन का विस्तार आवश्यक है। 18 अप्रैल तक चलने वाले इस सत्र में इस विधेयक पर गहन चर्चा और मतदान होने की उम्मीद है।
लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘महिला आरक्षण विधेयक’ यानी नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम खुशकिस्मत हैं कि हम इस पल के साक्षी बनने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा यकीन है कि इस मंथन से अमृत निकलेगा और यह मंथन देश की दिशा और दशा तय करेगा। पीएम मोदी ने कहा कि आज देश के लिए महत्वपूर्ण दिन है। यह 20-25 वर्ष पहले हो जाना चाहिए था, समय-समय पर इसमें सुधार होते रहते। सदन के सभी साथियों को यह अवसर मिला है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित अन्य विपक्षी दलों ने इस परिसीमन प्रक्रिया को एक ‘खतरनाक योजना’ करार देते हुए कड़ा विरोध जताया है। विपक्ष का मुख्य तर्क है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से दक्षिणी और पूर्वोत्तर राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा, जबकि उत्तर भारतीय राज्यों को इसका अनुचित लाभ मिलेगा। हालांकि, विपक्षी पार्टियों ने स्पष्ट किया है कि वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं और वे चाहते हैं कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ को बिना किसी क्षेत्रीय भेदभाव के लागू किया जाए। इस मुद्दे को लेकर सदन में भारी हंगामे के आसार बने हुए हैं।
विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आश्वस्त किया है कि परिसीमन आयोग अपनी प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरतेगा और हर राजनीतिक दल से सलाह-मशविरा किया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह संशोधन लोकतांत्रिक ढांचे को और अधिक समावेशी और सशक्त बनाने के लिए अनिवार्य है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि विकास और प्रतिनिधित्व के संतुलन को ध्यान में रखते हुए ही आगे बढ़ा जाएगा। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार और विपक्ष के बीच इस जटिल मुद्दे पर कोई आम सहमति बन पाती है या यह सत्र टकराव की भेंट चढ़ जाएगा।