मथुरा में अंतिम संस्कार के लिए विघुत- गैस शव दाहग्रह तैयार, श्मशान घाट पर ही कर सकेंगे उठावनी और नो-नहान

मथुरा। शहर के ध्रुवघाट श्मशान स्थल और पल्ली पार के महाराजा अग्रसेन श्मशान स्थल का स्वरूप बदलने जा रहा है। एक ओर जहां मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण द्वारा विघुत शवदाह गृह की स्थापना जा रही है वहीं दूसरी ओर के श्मशान घाट पर शोकाकुल लोगों के लिए शौचालय मूत्रालय का एक ब्लॉक बनकर तैयार हो गया है तथा 5 नई भट्टी का निर्माण कार्य कराया जा रहा है । शमशान संचालन समिति के प्रबंध मंत्री शशि भानु गर्ग के अनुसार दोनों श्मशान घाट स्थलों को हरा-भरा रखने के लिए वाटिका तैयार हो गई है। ध्रुवघाट पर उठावनी के लिए एयर कंडीशन हॉल के अलावा शीघ्र नो-नहान घर आम जन के लिए समर्पित किया जायेगा।
मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण करीब साढ़े तीन करोड़ रुपए विघुत गैस शवदाह गृह पर व्यय कर रहा है। इसके अलावा पल्ली पार पर शौचालय मूत्रालय के ब्लॉक बनाने पर करीब 30 लाख रूपए खर्च होंगे। मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष नगेंद्र प्रताप का कहना है कि हमारा प्रयास है कि अधिक से अधिक सुविधा प्राधिकरण आम नागरिकों के लिए उपलब्ध करा सकें उस के प्रयास लगातार किए जा रहे है। प्राधिकरण के अवर अभियंता सुनील अग्रवाल के अनुसार अगले तीन महीने में अत्याधुनिक विघुत गैस शव दाह ग्रह का निर्माण कार्य पूरा हो जायेगा।

ध्रुवघाट पर करोड़ों की लागत से तैयार होने वाले इस विघुत-गैस शवदाह ग्रह का निर्माण कार्य अन्तिम चरण में है इसके साथ ही अधिक से अधिक सुविधा उपलब्ध कराने के प्रयास में मथुरा ध्रुवघाट श्मशान स्थल संचालन समिति द्वारा यमुना पालीपार स्थित महाराजा अग्रसेन श्मशान स्थल पर शोचालय, मूत्रालय व स्नान घर का नवीन निर्माण के साथ नवीन शवदाह भट्टी के निर्माण के साथ उठावनी हेतु भी हॉल तैयार कराया जा रहा है। ध्रुवघाट श्मशान स्थल पर उठावनी हेतु वातानूकूतिल हॉल की व्यवस्था कि गई है जो निःशुल्क उपलब्ध होगी ।
समिति अध्यक्ष वीरेन्द्र अग्रवाल मंत्री अनिल मित्तल के नेतत्व में मथुरा ध्रुवघाट श्मशान स्थल संचालन समिति निरतंर कार्य कर रही है यहाँ प्रमुख समाज सेवी स्व. सुरेश चन्द्र अग्रवाल सुपाड़ी वालों की स्मृति में निर्माणधीन नो-नहाना घर का निर्माण भी अन्तिम चरण में है। इसके अलावा प्रमुख व्यवसायी ब्रजवासी मिठाई वालो के पिताश्री और बाबूलाल अग्रवाल मोटर वालों की स्मृति में देशी-विदेशी फूलों व रंग-बिरंगे फुब्बारो से सुसज्जित वाटिकाओं का निर्माण कराया गया है।