प्रधानमंत्री मोदी का मथुरा यात्रा के धार्मिक या राजनीतिक मायने?

-विनोद ताकियावाला-

देश की राजधानी दिल्ली हमेशा ही चर्चा के केन्द्र में रहती है। चाहे वह राजनीतिक हो, समाजिक, राष्ट्रीय हो अन्तराष्ट्रीय। हमेशा ही दिल्ली की चर्चा व चिन्तन का केन्द्र मे रह कर दिशा व दशा र्निधारित करता है। आज हम देश के बदलते राजनीतिक परिस्थिति व परिवेश में विगत दिनों प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का मथुरा यात्रा के धार्मिक व राजनीतिक मायने के कपास लगाये जा रहे है। जैसा कि आप को मालुम है कि इन दिनों भारतीय राजनीति की फ़िज़ा में पांच राज्यों के विधान सभा के चुनाव की प्रक्रिया अपनी चरम पर है। पांच राज्यों के विधान सभा चुनावों के परिणाम तीन दिसम्बर को आने वाली है। ऐसे में सभी राजनीतिक दल अपनी पार्टीयों को सता के सिंघासन पर आशीन करनें के लिए अपनी सारी शक्तियाँ झोंक दिया है। चाहे वह कांग्रेस हो या भारतीय जनता पार्टी है। चुनावी रणनीति में अपनी पार्टी को विजय श्री दिलाने हेतू भाजपा व मोदी को विजय श्री का मंत्र महारत हासिल है। ऐसे में समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विगत बुधवार को उत्तर प्रदेश के श्रीकृष्ण की जन्म स्थली मथुरा का दौरा वह भी जब अगले वर्ष 24 में लोक सभा का चुनावी वर्ष है। ऐसे में प्रधानमंत्री का मथुरा का दौरा किया। जहाँ उन्होने मीराबाई के सम्मान में एक स्मारक डाक टिकट और 525 रुपये का एक विशेष स्मारक सिक्का जारी किया। इस अवसर पर उन्होंने अपने अंदाज में कहा कि भगवान श्री कृष्ण लेकर मीरा बाई तक का गुजरात से एक अलग रिश्ता रहा है। मथुरा के कान्हा ही गुजरात जाकर द्वारकाधीश बने थे… वही मीरा की भक्ति बिना वृंदावन के पूरी नहीं होती है।

यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे आज ब्रज के दर्शन का अवसर मिला है, ब्रजवासियों के दर्शन का अवसर मिला है, क्योंकि यहां वही आता है जिसे श्रीकृष्ण और श्रीजी बुलाते हैं। ये कोई साधारण धरती नहीं है। ये ब्रज तो हमारे ‘श्यामा-श्याम जू’ का अपना धाम है ब्रज ‘लाल जी’ और ‘लाडली जी’ के प्रेम का साक्षात् अवतार है। ये ब्रज ही है, जिसकी रज भी पूरे संसार में पूजनीय है। भगवान कृष्ण से लेकर मीराबाई तक, ब्रज का गुजरात से एक अलग ही रिश्ता रहा है। मोदी ने कहा कि मेरे लिए इस समारोह में आना एक और वजह से विशेष है। भगवान कृष्ण से लेकर मीराबाई तक, ब्रज का गुजरात से एक अलग ही रिश्ता रहा है। राजस्थान से आकर मथुरा-वृन्दावन में प्रेम की धारा बहाने वाली संत मीराबाई जी ने भी जीवन के अंतिम क्षण द्वारिका में ही बिताया था। मीरा की भक्ति बिना वृंदावन पूरी नहीं होती है। उन्होंने कहा कि मीराबाई का 525वां जन्मोत्सव केवल एक संत का जन्मोत्सव नहीं है। ये भारत की एक सम्पूर्ण संस्कृति का उत्सव है, ये प्रेम-परंपरा का उत्सव है, ये उत्सव नर और नारायण में, जीव और शिव में, भक्त और भगवान में, अभेद मानने वाले विचार का भी उत्सव है।’

मोदी ने कहा कि हमारा भारत हमेशा से नारीशक्ति का पूजन करने वाला देश रहा है। ये बात ब्रजवासियों से बेहतर और कौन समझ सकता है। यहां सम्बोधन, संवाद, सम्मान, सब कुछ राधे-राधे कहकर ही होता है। कृष्ण के पहले भी जब राधा लगता है, तब उनका नाम पूरा होता है। इसलिए हमारे देश में महिलाओं ने हमेशा जिम्मेदारियां भी उठाई हैं, और समाज का लगातार मार्गदर्शन भी किया है। उन्होंने कहा कि संत मीराबाई जी ने उस कालखंड में समाज को वो राह भी दिखाई, जिसकी उस समय सबसे ज्यादा जरूरत थी। भारत के ऐसे मुश्किल समय में मीराबाई जैसी संत ने दिखाया कि नारी काआत्मबल, पूरे संसार को दिशा देने का सामर्थ्य रखता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्रज क्षेत्र ने मुश्किल से मुश्किल समय में भी देश को संभाले रखा। लेकिन जब देश आज़ाद हुआ, तो जो महत्व इस पवित्र तीर्थ को मिलना चाहिए था, वो हुआ नहीं। देवस्थान का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज काशी में विश्वनाथ धाम भव्य रूप में हमारे सामने है। आज उज्जैन के महाकाल महालोक में दिव्यता के साथ-साथ भव्यता के दर्शन हो रहे हैं। आज केदार घाटी में केदारनाथ जी के दर्शन करके लाखों लोग धन्य हो रहे हैं। अब तो, अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर के लोकार्पण की तिथि भी आ गई है। मथुरा और ब्रज भी, विकास की इस दौड़ में अब पीछे नहीं रहेंगे। वो दिन दूर नहीं जब ब्रज क्षेत्र में भी भगवान के दर्शन और भी भव्यता के साथ होंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्रज क्षेत्र में, देश में हो रहे ये बदलाव, ये विकास केवल व्यवस्था का बदलाव नहीं है। ये हमारे राष्ट्र के बदलते स्वरूप का, उसकी पुनर्जागृत होती चेतना का प्रतीक है।

महाभारत प्रमाण है कि, जहाँ भारत का पुनरुत्थान होता है, वहां उसके पीछे श्रीकृष्ण का आशीर्वाद जरूर होता है। उसी आशीर्वाद की ताकत से हम अपने संकल्पों को पूरा करेंगे और विकसित भारत का निर्माण करेंगे। श्री कृष्ण की जन्म स्थली पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट किया करते हुए लिखा था, ‘संत मीराबाई का जीवन निश्छल भक्ति और आस्था का अनुपम उदाहरण है। भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित उनके भजन और दोहे आज भी हम सभी के अंतर्मन को श्रद्धा-भाव से भर देते हैं। सर्व विदित रहे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चौथी बार मथुरा पहुंचे हैं। आप को मालुम होगा कि नये साल में अयोध्या में राम मंदिर में उद्घाटन की तारीख निश्चित हो गई है। ऐसे में कृष्ण भक्तो व मथुरा वासियों की प्रधान मंत्री से आशा व अपेक्षा है कि कृष्ण जन्म भुमि का विकाश हो। आप को बता दे कि बांके बिहार कॉरिडोर के लिए हाई कोर्ट ने मंजूरी दे दी है। अब कॉरिडोर बनाने के लिए बजट पर सिर्फ फैसला होना है। जानकारों का मानना है कि इस कार्य के लिए कुल बजट लगभग 1 हजार करोड़ रुपये का बताया जा रहा है।

सूत्रों का कहना है कि पहले चरण में 300 करोड़, दूसरे चरण में 500 करोड़ से ज्यादा और तीसरे चरण में करीब 100 करोड़ पास किया जाएगा। केंद्र सरकार कॉरिडोर निर्माण में राज्य सरकार की मदद करेगी। यह तो आने वाले दिनों पर र्निभर करेगा। फिलहाल प्रधान मंत्री जी कृष्ण प्रेम’मीराबाई के प्रति प्रतिष्ठा व उनके सम्मान में डाक टिकट व सिक्का जारी करने व श्रीकृष्ण का मथुरा से गुजरात के द्वारका से पुरानारिश्ता को याद दिलाया गया। उससे विपक्षी राजनीतिक दलो व राजनीतिक पंडितों के मध्य दबी जुबान से चर्चा व चिन्तन हो रही है कि क्या प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी मथुरा का यह दौरा धार्मिक नग्मण व राजनीतिक100 फीसदीविशुद्ध राजनतिक लाभ व वोट की राजनीतिक लाभ उठाने की मंशा है क्योकिं पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव खास कर सटे राज्य राजस्थान के मतदाताओं व अगले वर्ष होने लोक सभा आम चुनाव में भारतीय मतदाताओं विशेष कर एक वर्ग विशेष के मतदाताओं को अपने पार्टी के पक्ष में मतदान करने की कोशिस है। वही दुसरी ओर विपक्षी गजनीतिक पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं व उनके समथकों का मानना है कि भगवान श्रीकृष्ण हमेशा ही अपने सच्चे भक्तों की पुकार सुनता है। इतिहास साक्षी है कि भगवान श्री कृष्ण नें द्वापर युग में कौरव व पाडवों के मध्य छिड़ी महाभारत युद्ध में कर्म व सच्चाई का साथ दिया है। भले ही चाहे वह परिवार हो या रणभूमि।

खैर मुझे लगता है कि सता पक्ष व विपक्ष के इस पचड़े में पड़ने की बजाय अभी सही समय का इंतजार करना ही सही होगा, क्योकि अतीत के गर्भ क्या है यह तो आने वाले 5 राज्यों के विधान सभा चुनाव के परिणाम व आगामी वर्ष 24 मे होने वाले लोक सभा चुनाव मेंजनता जर्नादन के अपनी स्वविवेक व बुद्धि पर र्निभर करेगा। फिलहाल आप सभी से यह कहते हुए विदा लेते है कि ना ही काहुँ से दोस्ती, ना ही काहुँ से बैर। खबरीलाल तो माँगे, सबकी खैर॥फिर मिलेगें तीरक्षी नजर सें तीखी खबर के सं। तब तक के लिए अलविदा।