मतदाता सूची के काम में यूपी के सात जिलों की सराहना, मथुरा, अमेठी भी शामिल

निर्वाचन अधिकारियों ने विशेष मतदाता पंजीकरण अभियान के प्रयासों को सराहा, युवा जिलाधिकारियों के नेतृत्व में टीमों ने संभाली जिम्मेदारी

मथुरा । उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को अधिक समावेशी बनाने और पात्र नागरिकों का नाम निर्वाचक नामावली में दर्ज कराने के लिए चलाए जा रहे विशेष पंजीकरण अभियान में मथुरा सहित सात जिलों के प्रयासों की सराहना की गई है। इन जिलों में हाथरस, गाजीपुर, संभल, कौशांबी, मथुरा, अमेठी और बाराबंकी शामिल हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने विशेष मतदाता पंजीकरण अभियान के प्रभावी संचालन के लिए संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों के प्रयासों की प्रशंसा की। यह सराहना ऐसे समय में सामने आई है, जब मतदाता सूची को दुरुस्त करने, नए मतदाताओं को जोड़ने और पात्र नागरिकों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

इस उपलब्धि में मथुरा का शामिल होना जिले के निर्वाचन प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण है। जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह के नेतृत्व में मतदाता पंजीकरण से जुड़े कार्यों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है। निर्वाचन संबंधी गतिविधियों में बूथ स्तर तक अधिकारियों और कर्मचारियों की सक्रियता, मतदाताओं को जागरूक करने तथा नए आवेदन प्राप्त करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

निर्वाचन अधिकारियों की सराहना वाले सात जिलों में से अधिकांश में अपेक्षाकृत युवा पीढ़ी के प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती भी चर्चा का विषय है। अमेठी में सन 2017 बैच के शशांक चौधरी, बाराबंकी में ईशान प्रताप सिंह, संभल में अंकित खंडेलवाल, गाजीपुर में अनुपम शुक्ला और कौशांबी में डॉ. अमित पाल शर्मा जैसे अधिकारियों के नाम सामने आए हैं। हाथरस में सत्य प्रकाश पटेल तथा मथुरा में चंद्र प्रकाश सिंह जिला निर्वाचन प्रशासन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। हालांकि, निर्वाचन अधिकारियों की सराहना का आधार अभियान के संचालन से जुड़ा कार्य है; इसे केवल अधिकारियों की आयु या सेवा के वर्ष से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।

मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने का अभियान लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी जरूरतों में शामिल है। 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवाओं को मतदाता बनने का अवसर देना, सूची में नाम दर्ज कराने से छूटे पात्र नागरिकों तक पहुंचना और नाम-पते जैसी जानकारियों में आवश्यक संशोधन कराना इस प्रक्रिया के प्रमुख उद्देश्य हैं। इसके लिए बूथ लेवल अधिकारी यानी बीएलओ की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रहती है। वे मतदाताओं को आवेदन प्रक्रिया समझाने, आवश्यक दस्तावेजों के संबंध में जानकारी देने और बूथ स्तर पर लोगों की समस्याओं का समाधान कराने में सहयोग करते हैं।

हाल ही में चलाए गए विशेष पंजीकरण अभियान के दौरान बूथों पर अधिकारियों और कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, महिला मतदाताओं और युवा मतदाताओं को प्रोत्साहित करने तथा आवेदन प्राप्त करने पर जोर दिया गया। मुख्य निर्वाचन अधिकारी की समीक्षा में जिन सात जिलों के प्रयासों की प्रशंसा की गई, वहां अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने की बात सामने आई। दूसरी ओर, कुछ जिलों को मतदाता पंजीकरण की गति बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए। इससे स्पष्ट है कि निर्वाचन प्रशासन का लक्ष्य केवल आवेदन प्राप्त करना नहीं, बल्कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उनकी जांच और निस्तारण कर पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल करना भी है।

मथुरा जैसे जिले में मतदाता सूची से जुड़ा काम विशेष महत्व रखता है। शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों में भी पात्र नागरिकों तक पहुंचना, पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं को जागरूक करना और लोगों को अपने नाम की स्थिति जांचने के लिए प्रेरित करना जरूरी है। मतदाता सूची में किसी पात्र नागरिक का नाम छूटना उसके मतदान के अधिकार के उपयोग में बाधा बन सकता है। इसलिए अभियान की सफलता का आकलन आवेदन संख्या के साथ-साथ उनके सत्यापन, समयबद्ध निस्तारण और अंतिम सूची की शुद्धता के आधार पर भी किया जाना चाहिए।

नए बैच के अधिकारियों की सक्रियता को लेकर चर्चा के बीच यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि निर्वाचन कार्य किसी एक अधिकारी के प्रयास से पूरा नहीं होता। जिलाधिकारी के नेतृत्व में अपर जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी, तहसील प्रशासन, निर्वाचन कार्यालय, बीएलओ और अन्य कर्मचारियों के समन्वित प्रयास से ही बूथ स्तर पर अभियान प्रभावी बनता है। ऐसे में जिला निर्वाचन अधिकारियों की सराहना पूरी प्रशासनिक टीम के लिए प्रोत्साहन का काम करती है।

निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। मतदाता सूची में नाम जोड़ने अथवा संशोधन करने के लिए प्राप्त आवेदनों का नियमानुसार सत्यापन आवश्यक है। केवल आवेदन प्राप्त हो जाना नाम दर्ज होने की अंतिम पुष्टि नहीं माना जा सकता। इसी कारण नागरिकों को भी अपनी जानकारी जांचने और आवश्यकता होने पर निर्धारित प्रपत्र के माध्यम से आवेदन करने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

मथुरा सहित सात जिलों के प्रयासों की सराहना से स्थानीय निर्वाचन प्रशासन का उत्साह बढ़ने की उम्मीद है। अब चुनौती इस गति को आगे भी बनाए रखने, प्रत्येक पात्र नागरिक तक पहुंचने और मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने की है। लोकतंत्र की मजबूती का आधार यही है कि कोई भी पात्र नागरिक जानकारी के अभाव या प्रशासनिक चूक के कारण अपने मताधिकार से वंचित न रह जाए।