नोएडा । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के फेज-1 का उद्धाटन किया। यह अभी भारत का सबसे बडा और एशिया का दूसरा सबसे बड़ा एयरपोर्ट है। 4 फेज पूरे होने पर यह एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट हो जाएगा
इस बीच नोएडा एयरपोर्ट के उद्घाटन समारोह में पीएम मोदी ने कहा, अभी आधा काम हुआ है। मैंने सिर्फ पर्दा हटाया है, मैं चाहता हूं कि जो भी उपस्थित है, आप सब करें। इसलिए आप अपना मोबाइल फोन निकालिए। अपने मोबाइल फोन का फ्लैश लाइट ऑन करिए। पीएम मोदी की अपील के बाद लोगों ने भी हाथों में मोबाइल लेकर फ्लैश लाइट जलाई। इसके बाद पीएम मोदी ने कहा, अब यहां उपस्थित हर व्यक्ति इस एयरपोर्ट का उद्घाटन कर रहा है। यह आपकी अमानत है, यह आपका पुरुषार्थ है। इसलिए इसका उद्घाटन आपके हाथों से हो रहा है। पीएम मोदी ने कहा, ‘ये एयरपोर्ट जनता की अमानत है। इसलिए एयरपोर्ट का उद्घाटन आप लोग करेंगे। मौजूद जनता एयरपोर्ट का उद्घाटन करे।’
पीएम मोदी ने आगे कहा, ‘यह सभी प्रोजेक्ट पूरा होना डबल इंजन की सरकार का शानदार उदाहरण है। सेमीकंडक्टर फैक्टरी भारत को तकनीकी में आगे बढ़ा रही है। मेरठ मेट्रो और नमो भारत रेल तेज और स्मार्ट कनेक्टिविटी दे रही है और यह हमारा जेवर एयरपोर्ट, पूरे उत्तर भारत को दुनिया से जोड़ रहा है। आपने वीडियो में देखा, यह ऐसा एयरपोर्ट बन रहा है, जिससे हर दो मिनट में एक जहाज उड़ेगा।’
नोएडा एयरपोर्ट के उद्घाटन कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी जी का बहुत आभार। हम नए भारत का दर्शन कर रहे हैं। जेवर एयरपोर्ट से यूपी को नई उड़ान मिलेगी। जेवर एयरपोर्ट विकास का उदाहरण है। पिछले 11-12 वर्षों में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जो कार्ययोजना बनी है, आज हम सबको देखने को मिल रही है। भारत के अंदर पेट्रोलियम उत्पादों का दाम नियंत्रित है। उसकी आपूर्ति स्मूथ बनाई गई है। उस पूरी व्यवस्था में अमेरिका जैसे विकसित देशों में भी पेट्रोलियम उत्पादों के दाम आसमान छूते दिख रहे हैं।
फर्स्ट फेज में 3300 एकड में टर्मिनल और रनवे बनाया गया
है। एक रनवे के साथ इस टर्मिनल की सालाना क्षमता 3
करोड पैसेंजर संभालने की होगी। इसकी लागत करीब 11,200
हजार करोड है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट 52 स्क्वायर किमी में बनना
प्रस्तावित है। अभी चीन का बीजिंग डेक्सिंग इंटरनेशनल
एयरपोर्ट एशिया में सबसे बडा है। इसका एरिया 47 स्क्वायर
किमी है। हालांकि, पूरा बनने की डेडलाइन 2040 है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट में घने कोहरे, बहुत कम विजिबिलिटी और बारिश के दौरान भी विमानों की उड़ान और लैंडिंग हो सकेगी। एयरपोर्ट में इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) के सबसे हाई लेवल तकनीकि सिस्टम कैट थ्री का इस्तेमाल किया जाएगा। इस तकनीकि के जरिए कम दृश्यता में भी सुरक्षित लैंडिंग कराई जाती है। आमतौर पर पायलट इस तकनीकि का इस्तेमाल तब करते हैं, जब उन्हें बाहर कुछ भी दिखाई न दे रहा हो और लैंडिंग के लिए पूरी तरह से उन्हें तकनीकि पर निर्भर होना पड़ता है।