स्वतंत्रता का अर्थ और विकसित भारत का संकल्प

पन्द्रह अगस्त केवल ध्वजारोहण और राष्ट्रगान का दिन नहीं बल्कि आत्ममंथन का अवसर भी है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि जिन स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर किया था उनके सपनों का भारत बनाने की जिम्मेदारी अब हमारी है। 1947 में भारत विदेशी शासन से मुक्त हुआ लेकिन स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ तभी पूरा होगा जब देश गरीबी अशिक्षा बेरोजगारी भ्रष्टाचार भेदभाव हिंसा और सामाजिक संकीर्णताओं से भी मुक्त होगा। आजादी के बाद भारत ने जिस तरह विकास की यात्रा तय की है वह निश्चित रूप से गौरव का विषय है। खाद्यान्न संकट से जूझने वाला देश आज कृषि उत्पादन के साथ डेयरी मत्स्य और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में मजबूत स्थिति में है। औद्योगिक विकास ने देश को नई गति दी है। सड़क रेलवे बिजली बंदरगाह हवाई अड्डे और आधुनिक परिवहन व्यवस्था ने विकास की तस्वीर बदली है। इस्पात ऑटोमोबाइल दवा इलेक्ट्रॉनिक्स दूरसंचार और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में भारत ने अपनी क्षमता साबित की है।

भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियां भी पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। अंतरिक्ष कार्यक्रम से लेकर चंद्रयान और आदित्य-एल1 जैसे अभियानों तक देश ने अपनी वैज्ञानिक क्षमता का परिचय दिया है। डिजिटल भुगतान इंटरनेट मोबाइल संचार और डिजिटल सेवाओं ने आम नागरिक के जीवन को बदला है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लेकर सेमीकंडक्टर और आधुनिक विनिर्माण तक भारत नए क्षेत्रों में अपनी जगह मजबूत कर रहा है। रक्षा के क्षेत्र में भी भारत ने लंबी यात्रा तय की है। भारतीय सेनाओं के साहस और पराक्रम के साथ स्वदेशी रक्षा उत्पादन ने देश की सुरक्षा क्षमता को मजबूत किया है। लड़ाकू विमान मिसाइल प्रणालियां युद्धपोत पनडुब्बियां और अन्य रक्षा उपकरणों का देश में निर्माण आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विश्व मंच पर भी भारत की भूमिका लगातार प्रभावशाली हुई है। अनेक वैश्विक मुद्दों पर भारत की आवाज को महत्व मिल रहा है। लेकिन उपलब्धियों के बीच कुछ सवाल हमें परेशान भी करते हैं। क्या विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचा है? क्या हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है? क्या युवाओं को पर्याप्त रोजगार और अवसर मिल रहे हैं? क्या गांव और शहर के बीच सुविधाओं की खाई कम हुई है? क्या महिलाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं? क्या भ्रष्टाचार सामाजिक भेदभाव और अपराध से हम पर्याप्त रूप से मुक्त हो पाए हैं? इन सवालों से मुंह मोड़ना स्वतंत्रता दिवस की भावना के साथ न्याय नहीं होगा। विकसित भारत केवल ऊंची इमारतों चौड़ी सड़कों और आधुनिक तकनीक का नाम नहीं है। किसी राष्ट्र के विकास का वास्तविक पैमाना उसके नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता है। शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार और सामाजिक सुरक्षा इसके मूल आधार हैं। गांवों में भी अच्छे विद्यालय अस्पताल इंटरनेट परिवहन और रोजगार के अवसर उपलब्ध होने चाहिए। आर्थिक विकास के साथ रोजगार सृजन को प्राथमिकता देनी होगी। देश की युवा आबादी हमारी सबसे बड़ी शक्ति है और इस शक्ति को कौशल शिक्षा उद्यमिता विनिर्माण कृषि आधारित उद्योग पर्यटन और नई तकनीकों के अवसरों से जोड़ना होगा।

विकसित भारत के लिए सामाजिक समरसता भी अनिवार्य है। जाति भाषा क्षेत्र और संप्रदाय के नाम पर होने वाला विभाजन देश की शक्ति को कमजोर करता है। भारत की विविधता उसकी पहचान है लेकिन विविधता का अर्थ विभाजन नहीं होना चाहिए। हर नागरिक को अपनी भाषा संस्कृति और परंपरा पर गर्व हो लेकिन राष्ट्रहित सर्वोपरि रहे। साम्प्रदायिक सद्भाव और परस्पर सम्मान के बिना विकास की यात्रा अधूरी रहेगी। भ्रष्टाचार और राजनीतिक स्वार्थ से मुक्ति भी आवश्यक है। लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने की व्यवस्था नहीं बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही का माध्यम है। सत्ता किसी भी दल की हो उसका उद्देश्य जनसेवा होना चाहिए। राजनीति में विचार सिद्धांत त्याग और राष्ट्रहित की भावना मजबूत होगी तभी लोकतंत्र के प्रति लोगों का विश्वास और गहरा होगा। इस परिवर्तन में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। युवाओं को केवल सोशल मीडिया की बहस या विरोध तक सीमित रहने के बजाय विज्ञान शिक्षा खेल कृषि उद्यमिता तकनीक प्रशासन सेना और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में अपनी ऊर्जा लगानी होगी। नशे हिंसा और डिजिटल माध्यमों के दुरुपयोग से दूर रहकर अनुशासन परिश्रम ईमानदारी और नवाचार को जीवन का आधार बनाना होगा। पन्द्रह अगस्त हमें अधिकारों के साथ कर्तव्यों की भी याद दिलाता है। हमें कानून का सम्मान करना होगा। सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करनी होगी। पर्यावरण बचाना होगा। सामाजिक सद्भाव बनाए रखना होगा और अपने कार्यक्षेत्र में ईमानदारी से योगदान देना होगा। स्वतंत्रता केवल विदेशी शासन से मुक्ति नहीं बल्कि अज्ञान भय गरीबी भेदभाव अन्याय और नशे जैसी बुराइयों से मुक्ति का भी नाम है। स्वतंत्रता सेनानियों ने हमें आजाद भारत सौंपा था। अब विकसित समृद्ध सुरक्षित शिक्षित स्वस्थ आत्मनिर्भर और संस्कारवान भारत अगली पीढ़ी को सौंपना हमारी जिम्मेदारी है।