शिक्षा सुधार से ही विकसित भारत का मार्ग

किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके प्राकृतिक संसाधनों में नहीं बल्कि उसके शिक्षित और सक्षम नागरिकों में निहित होती है। जापान दक्षिण कोरिया सिंगापुर और फिनलैंड जैसे देशों ने यह सिद्ध किया है कि मजबूत शिक्षा व्यवस्था सीमित संसाधनों वाले देशों को भी वैश्विक नेतृत्व दिला सकती है। भारत आज विश्व की सबसे युवा आबादी वाला देश है। यह जनसांख्यिकीय शक्ति तभी राष्ट्रीय संपदा बनेगी जब उसे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आधुनिक कौशल और शोध के पर्याप्त अवसर उपलब्ध होंगे। अन्यथा यही युवा आबादी बेरोजगारी सामाजिक असमानता और आर्थिक चुनौतियों का कारण बन सकती है। इसलिए शिक्षा तंत्र में व्यापक और प्रभावी सुधार अब विकल्प नहीं बल्कि राष्ट्रीय आवश्यकता बन चुका है।

शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री या परीक्षा में सफलता तक सीमित नहीं होना चाहिए। वास्तविक शिक्षा वह है जो व्यक्ति में तार्किक सोच वैज्ञानिक दृष्टिकोण नैतिकता सामाजिक उत्तरदायित्व और नवाचार की भावना विकसित करे। दुर्भाग्य से आज शिक्षा का बड़ा हिस्सा अंकों और प्रतियोगी परीक्षाओं की दौड़ तक सिमट गया है। इससे रचनात्मकता और व्यावहारिक ज्ञान प्रभावित हो रहे हैं। किसी भी शिक्षा व्यवस्था की नींव प्राथमिक शिक्षा होती है। यदि विद्यालय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिलेगी तो उच्च शिक्षा भी मजबूत नहीं बन सकती। आज देश के अनेक सरकारी विद्यालय शिक्षक भवन प्रयोगशालाओं पुस्तकालयों और डिजिटल संसाधनों जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह स्थिति और अधिक गंभीर है जिससे ग्रामीण और शहरी विद्यार्थियों के बीच शैक्षणिक असमानता लगातार बढ़ रही है। सरकारी विद्यालयों को योजनाओं का केंद्र नहीं बल्कि उत्कृष्ट शिक्षा के आदर्श संस्थान बनाना समय की मांग है। शिक्षा की गुणवत्ता का सबसे महत्वपूर्ण आधार शिक्षक होता है। प्रेरित प्रशिक्षित और सम्मानित शिक्षक ही विद्यार्थियों का भविष्य संवार सकते हैं। लेकिन अनेक राज्यों में शिक्षक पद लंबे समय से रिक्त हैं और बड़ी संख्या में विद्यालय अस्थायी शिक्षकों के भरोसे संचालित हो रहे हैं। साथ ही शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में लगाने से शिक्षण प्रभावित होता है। शिक्षक भर्ती नियमित प्रशिक्षण आधुनिक शिक्षण तकनीकों और सम्मानजनक कार्य वातावरण पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में कृत्रिम बुद्धिमत्ता रोबोटिक्स डेटा साइंस साइबर सुरक्षा जैव प्रौद्योगिकी और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्र भविष्य तय करेंगे। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था को भी समयानुकूल बनाना होगा। आज भी अनेक संस्थानों में पुराने पाठ्यक्रम पढ़ाए जा रहे हैं जिनका उद्योगों की आवश्यकताओं से पर्याप्त तालमेल नहीं है। परिणामस्वरूप डिग्रीधारी युवाओं की संख्या बढ़ रही है लेकिन रोजगार योग्य युवाओं की कमी बनी हुई है। शिक्षा को कौशल विकास उद्योग और अनुसंधान से जोड़ना अनिवार्य है।

प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक परीक्षा रद्द होने और परिणामों में देरी जैसी घटनाओं ने लाखों युवाओं का विश्वास कमजोर किया है। वर्षों की मेहनत तब व्यर्थ प्रतीत होती है जब परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। परीक्षा व्यवस्था को पूर्णतः सुरक्षित पारदर्शी और समयबद्ध बनाना होगा तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।
उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में भी भारत को बड़ी छलांग लगाने की आवश्यकता है। बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली विद्यार्थी बेहतर अनुसंधान सुविधाओं और शैक्षणिक वातावरण के कारण विदेशों का रुख करते हैं। यदि देश में विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय आधुनिक प्रयोगशालाएँ पर्याप्त अनुसंधान निधि और उद्योगों के साथ मजबूत सहयोग विकसित किया जाए तो प्रतिभा पलायन को काफी हद तक रोका जा सकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने बहुविषयक शिक्षा कौशल विकास मातृभाषा में शिक्षण और शोध को बढ़ावा देने जैसे कई सकारात्मक लक्ष्य निर्धारित किए हैं। किंतु किसी भी नीति की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों के साथ शिक्षकों अभिभावकों उद्योग जगत और समाज की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है।

यदि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाना है तो सबसे बड़ा निवेश शिक्षा में करना होगा। गुणवत्तापूर्ण विद्यालय सक्षम शिक्षक आधुनिक पाठ्यक्रम पारदर्शी परीक्षा प्रणाली विश्वस्तरीय शोध संस्थान और सभी के लिए समान अवसर ही विकसित भारत की मजबूत नींव बन सकते हैं। शिक्षा पर किया गया व्यय खर्च नहीं बल्कि राष्ट्र के भविष्य में किया गया सबसे महत्वपूर्ण निवेश है। अब समय आ गया है कि शिक्षा को राजनीतिक विमर्श से ऊपर उठाकर राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा अभियान बनाया जाए। जिस दिन देश का प्रत्येक बच्चा समान अवसरों के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करेगा उसी दिन विकसित भारत का सपना वास्तविकता के अधिक निकट होगा।