100% बुकिंग के बावजूद सीटें रहीं खाली, वेटिंग यात्रियों से वसूली गई दुगुनी रकम

नई दिल्ली/मथुरा। रेलवे की आरक्षण व्यवस्था की एक बड़ी खामी उजागर हुई है, जिसमें 100 प्रतिशत बुकिंग दर्शाए जाने के बावजूद ट्रेन में सीटें खाली रहीं, जबकि वेटिंग टिकटधारियों को यात्रा की अनुमति नहीं दी गई। इतना ही नहीं, चार्ट बनने के बाद टिकट स्वतः निरस्त कर दिए गए और जब यात्री ट्रेन में चढ़े तो उन्हें बिना वैध टिकट बताकर दोबारा पूरा किराया तथा अतिरिक्त शुल्क वसूला गया। इस जनविरोधी व्यवस्था को उजागर करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता के.सी. जैन ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को ई-मेल के माध्यम से विस्तृत पत्र भेजकर तत्काल सुधार की मांग की है।

अधिवक्ता जैन के अनुसार 15 फरवरी 2026 को गाड़ी संख्या 12049 गतिमान एक्सप्रेस से आगरा कैंट से हजरत निजामुद्दीन तक यात्रा के लिए तीन यात्रियों दीपिका जैन (43 वर्ष), अंकिता सिंघल (38 वर्ष) और शशांक जैन (40 वर्ष) ने टिकट बुक कराया था। चार्ट बनने के बाद टिकट की स्थिति क्रमशः वेटिंग सूची में 16, 17 और 18 रही। रेलवे नियमों के अनुसार यदि ई-टिकट पूरी तरह वेटिंग में रह जाता है तो चार्ट बनने के बाद वह स्वतः निरस्त हो जाता है। इसी आधार पर इन यात्रियों का टिकट निरस्त कर दिया गया और किराए में निर्धारित राशि की कटौती कर ली गई। यात्रियों का कहना है कि जब वे ट्रेन में चढ़े तो एसी चेयर कार में कई सीटें खाली थीं, लेकिन सिस्टम में टिकट निरस्त दिखने के कारण उन्हें वैध यात्री नहीं माना गया और उनसे नया टिकट अधिक दर पर जारी किया गया तथा अतिरिक्त शुल्क भी वसूला गया। इस प्रकार यात्रियों को पहले टिकट निरस्त होने पर किराए में कटौती और फिर यात्रा के दौरान पूरा किराया तथा जुर्माना देकर दोहरा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। यह स्थिति आम यात्रियों के लिए अत्यंत भ्रमित करने वाली और आर्थिक रूप से दंडात्मक है। जानकारों का कहना है कि आरक्षण चार्ट 100 प्रतिशत बुकिंग दिखाता है, लेकिन वास्तविक यात्रा के समय सीटें खाली रह जाती हैं, जिसके प्रमुख कारण अंतिम समय पर यात्रियों का न आना, बीच के स्टेशन से चढ़ने वाले यात्रियों का अनुपस्थित रहना, विभिन्न कोटा जैसे रक्षा, वीआईपी या विशेष श्रेणी की सीटों का उपयोग न होना तथा चार्ट बनने के बाद रद्दीकरण हैं। चूंकि चार्ट बनने के बाद सिस्टम गतिशील रूप से वेटिंग सूची को समायोजित नहीं करता, इसलिए सीटें खाली रह जाती हैं और वेटिंग यात्री बाहर रह जाते हैं।

अधिवक्ता जैन ने अपने पत्र में सवाल उठाया है कि जब सीटें वास्तविक रूप से उपलब्ध थीं तो पहले से टिकट लेकर स्टेशन पहुंचे यात्रियों को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई और क्या यह व्यवस्था न्यायसंगत है कि सीटें खाली चलें और भुगतान कर चुके यात्रियों को दंडित किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया है कि चार्ट बनने के बाद यदि सीटें खाली रह जाती हैं तो स्टेशन पर उपस्थित वेटिंग यात्रियों को वास्तविक समय में सीट आवंटित करने की व्यवस्था विकसित की जाए। आज के डिजिटल युग में टीटीई के हैंडहेल्ड उपकरण और केंद्रीय आरक्षण प्रणाली के माध्यम से यह तकनीकी रूप से संभव है। इससे कोई सीट खाली नहीं जाएगी, रेलवे की आय में वृद्धि होगी, यात्रियों को राहत मिलेगी तथा शिकायतों और विवादों में कमी आएगी। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इस सुधार को पहले वंदे भारत, गतिमान और शताब्दी जैसी प्रीमियम ट्रेनों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाए और सफल होने पर इसे अन्य ट्रेनों में भी विस्तार दिया जाए।

अधिवक्ता के.सी. जैन ने कहा कि यह मुद्दा केवल तीन यात्रियों का नहीं बल्कि लाखों वेटिंग यात्रियों की समस्या है। जब सीटें खाली हों तो वेटिंग यात्रियों को दंडित करना उचित नहीं है। तकनीकी सुधार से सीटों का शत-प्रतिशत उपयोग संभव है, जिससे यात्रियों को राहत मिलेगी और रेलवे को भी अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। उनका उद्देश्य व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, न्यायपूर्ण और जनहितकारी बनाना है।