मथुरा-वृंदावन बनेगा स्वच्छ और स्मार्ट तीर्थ शहर, ट्रैफिक जाम और प्रदूषण से राहत के लिए लागू होगा लो एमिशन जोन
होली के बाद दौड़ेंगी महानगर में 16 शीटर इलेक्ट्रिक बसें
मथुरा। देश और दुनिया के प्रमुख तीर्थ एवं धरोहर शहरों में शामिल मथुरा वृंदावन अब यातायात जाम और वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से राहत की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। शहर में बढ़ते वाहनों के दबाव और अव्यवस्थित परिवहन व्यवस्था से निपटने के लिए कम उत्सर्जन क्षेत्र यानी लो एमिशन जोन लागू करने की दिशा में ठोस पहल शुरू कर दी गई है। इसके तहत होली के बाद शहर में 16 सीटर इलेक्ट्रिक बसों का संचालन प्रस्तावित है।
कलक्ट्रेट सभागार में शुक्रवार को आयोजित प्रस्तुतीकरण में राहगीरी फाउंडेशन ने जिला प्रशासन के समक्ष मथुरा वृंदावन की यातायात व्यवस्था सुधारने और प्रदूषण कम करने के लिए व्यापक कार्ययोजना प्रस्तुत की। फाउंडेशन के वरिष्ठ प्रोजेक्ट एसोसिएट प्रतीक सेन गुप्ता ने बताया कि लो एमिशन जोन के तहत अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के प्रवेश को नियंत्रित किया जाएगा जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों और स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा दिया जाएगा।
बैठक में अधिकारियों और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत मंथन किया गया। इसमें स्थानीय यातायात चुनौतियों उत्सर्जन में कमी के अवसरों और पैदल व साइकिलिंग जैसे स्वच्छ गतिशीलता विकल्पों पर चर्चा हुई। इस पहल के तहत मथुरा वृंदावन के लिए एक प्रारंभिक नीति रोडमैप तैयार किया जाएगा जिसमें सभी विभागों के सुझाव शामिल होंगे।
जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने कहा कि ग्रीन मोबिलिटी ज़ोन ब्रज क्षेत्र की पहचान बदलने की दिशा में एक अहम पहल है। उन्होंने कहा कि मथुरा–वृंदावन आने वाले श्रद्धालु शांति और भक्ति की भावना लेकर आते हैं, लेकिन ट्रैफिक जाम और प्रदूषण उनकी यात्रा को प्रभावित करता है। जीएमजेड लागू होने से न केवल यातायात व्यवस्था सुधरेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य श्रद्धालुओं को स्वच्छ, सुरक्षित और सुगम यात्रा सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि उनकी धार्मिक अनुभूति बाधित न हो।
नगर आयुक्त जगप्रवेश ने बताया कि मथुरा–वृंदावन में चरणबद्ध तरीके से हरित परिवहन व्यवस्था विकसित की जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 तक शहर में कम से कम 50 प्रतिशत वाहनों को इलेक्ट्रिक बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए चार्जिंग स्टेशन, ई-बस सेवा और सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बाहरी पार्किंग स्थलों से मंदिरों और प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पर्यावरण मित्र ई-वाहन चलाए जाएंगे, जिससे भीड़ और प्रदूषण दोनों पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से शहर में जाम की समस्या कम होगी वायु गुणवत्ता सुधरेगी और श्रद्धालुओं तथा पर्यटकों को स्वच्छ सुव्यवस्थित परिवहन सुविधा मिलेगी। कार्यशाला में जिलाधिकारी सीपी सिंह एसएसपी श्लोक कुमार नगर आयुक्त जगप्रवेश एस पी सिटी राजीव कुमार एवं सहायक नगर आयुक्त कल्पना सिंह चौहान सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।