बजट से पहले मध्यम वर्ग की नई उम्मीदें, टैक्स और मेडिकल सुविधाओं में राहत की मांग

हर साल बजट से पहले देश का मध्यम वर्ग सरकार से कुछ नई राहतों की उम्मीद करता है। पिछले कुछ वर्षों में आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर 12 लाख रुपये किए जाने से मध्यवर्ग को बड़ी राहत मिली थी। कभी 5 लाख तक की आय को टैक्स फ्री किए जाने पर जिस तरह लोगों में उत्साह देखा गया था, उसी तरह अब 12 लाख की सीमा ने एक बार फिर उम्मीद जगाई है कि सरकार आम करदाताओं के हित में सोच रही है।
हालांकि, समय के साथ आवश्यकताएं भी बढ़ी हैं। ऐसे में आने वाले बजट को लेकर मध्यम वर्ग की नई आकांक्षाएं सामने आ रही हैं, जिनका सीधा असर अर्थव्यवस्था और निवेश पर भी पड़ सकता है।
वर्तमान में 70 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को 5 लाख रुपये तक की आयुष्मान भारत मेडिकल सुविधा दी जा रही है। मध्यम वर्ग का मानना है कि इस आयु सीमा को घटाकर 60 वर्ष किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि कोई व्यक्ति गरीब न हो, इसका अर्थ यह नहीं कि वह अमीर ही हो। बढ़ती महंगाई और इलाज के खर्च को देखते हुए यह सुविधा 60 वर्ष से ऊपर के सभी नागरिकों को मिलनी चाहिए।
पति-पत्नी को संयुक्त टैक्स रिटर्न की सुविधा
अन्य देशों की तरह भारत में भी पति-पत्नी को संयुक्त रूप से इनकम टैक्स रिटर्न भरने की सुविधा देने की मांग उठ रही है। यदि पति और पत्नी की कुल आय मिलाकर टैक्स लगाया जाए, तो कई परिवारों को बड़ी राहत मिल सकती है। उदाहरण के तौर पर, यदि एक की आय 14 लाख और दूसरे की 10 लाख हो, तो संयुक्त रूप से 24 लाख तक की आय पर टैक्स देनदारी शून्य की जा सकती है।
स्टैंडर्ड डिडक्शन को 75 हजार से बढ़ाकर 1 लाख रुपये करने की मांग की जा रही है। साथ ही यह सुविधा केवल वेतनभोगियों तक सीमित न रखकर सभी करदाताओं को दी जाए।
इसके अलावा, 80C की छूट को नए टैक्स रिजीम में भी लागू करने और इसकी सीमा 1.5 लाख से बढ़ाने की आवश्यकता जताई गई है।
शेयर बाजार निवेश पर टैक्स में राहत की उम्मीद
लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ (LTCG) पर वर्तमान में 12.5 प्रतिशत टैक्स लिया जा रहा है, जिसे पहले 10 प्रतिशत और उससे पहले शून्य रखा गया था। निवेशकों का मानना है कि इस दर को कम किया जाना चाहिए।
इसके साथ ही LTCG पर 1.25 लाख रुपये की टैक्स फ्री सीमा बढ़ाने और अल्प अवधि के पूंजीगत लाभ (STCG) पर 20 प्रतिशत टैक्स दर घटाने की मांग भी की जा रही है। स्टॉक ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) को भी कम किए जाने की अपेक्षा है, जिससे बाजार में निवेश बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

हालांकि सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन अब तक इनकम टैक्स भरने वालों की संख्या में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो सकी है। इसे प्रोत्साहित करने के लिए टैक्स रिटर्न भरने वालों को कुछ प्रत्यक्ष सुविधाएं देने की मांग उठी है।
जैसे – टोल टैक्स में छूट, मेडिकल इंश्योरेंस में सब्सिडी, हाउस टैक्स में राहत या अन्य महत्वपूर्ण सुविधाएं, जिससे लोगों को टैक्स भरने का प्रत्यक्ष लाभ दिखे।

कई सक्षम और प्रतिभाशाली लोग टैक्स के बोझ के कारण भारत छोड़कर उन देशों में चले जाते हैं, जहां टैक्स कम हैं। ऐसे में करदाताओं को आकर्षित करने और देश में पूंजी बनाए रखने के लिए टैक्स प्रणाली को व्यवस्थित रूप से सरल और कम करने की आवश्यकता बताई जा रही है।
मध्यम वर्ग का मानना है कि यदि इन मांगों में से 2-4 पर भी सरकार विचार करती है, तो इसका लाभ केवल करदाताओं को ही नहीं, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था को मिलेगा।