संविदा सफाई कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग का लाभ देने की मांग तेज
सफाई मजदूर संघ ने वित्त मंत्री को पत्र लिखकर वेतन पुनरीक्षण का किया आग्रह
मथुरा। उत्तर प्रदेश के नगर निकायों में कार्यरत संविदा सफाई कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग का लाभ दिलाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। प्रदेश अध्यक्ष सफाई मजदूर संघ महेश काजू ने वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना को पत्र लिखकर वेतन समिति (2016) के प्रथम प्रतिवेदन भाग-5 में की गई संस्तुतियों के आधार पर संविदा सफाई कर्मचारियों का वेतन मैट्रिक्स के अनुरूप पुनरीक्षण किए जाने की मांग की है।
उन्होंने पत्र में कहा है कि आगामी जनवरी से केंद्र सरकार द्वारा आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू किए जाने की संभावना है जिससे सरकारी कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि होगी। वहीं उत्तर प्रदेश के नगर निकायों में लगभग 19 वर्षों से कार्यरत संविदा सफाई कर्मचारियों को अब तक सातवें वेतन आयोग का लाभ नहीं मिल पाया है जिससे उनमें रोष व्याप्त है।
महेश काजू ने बताया कि वर्ष 2008 की वेतन समिति की संस्तुतियों के आधार पर संविदा सफाई कर्मचारियों का वेतन पुनरीक्षित किया गया था तथा शासनादेश के तहत नगर निकायों को बढ़े हुए व्ययभार को अपने संसाधनों से वहन करने के निर्देश दिए गए थे। इसके चलते राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार भी नहीं पड़ा था।
वर्ष 2016 में वेतन समिति की संस्तुतियों के बावजूद संविदा सफाई कर्मचारियों के वेतन का पुनरीक्षण नहीं किया गया, जिसके कारण उन्हें विगत दस वर्षों से सातवें वेतन आयोग का लाभ नहीं मिल सका है। इससे कर्मचारियों को प्रतिमाह आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, जो न्यायोचित नहीं है।
संगठन ने यह भी कहा कि लंबे समय से सेवा दे रहे संविदा सफाई कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए उनके वेतन पुनरीक्षण की प्रक्रिया शासन स्तर पर विचाराधीन है, लेकिन अब तक कोई ठोस आदेश जारी नहीं किया गया है।
सफाई मजदूर संघ ने वित्त मंत्री से अनुरोध किया है कि आठवें वेतन आयोग के लागू होने से पूर्व नगर निकायों में कार्यरत संविदा सफाई कर्मचारियों के वेतन को सातवें वेतन आयोग के अनुरूप पुनरीक्षित करने के आदेश शीघ्र जारी किए जाएं ताकि उन्हें भी न्याय मिल सके।