चंद्रग्रहण का प्रभाव: 2 मार्च को ही होगा होलिका दहन, 3 मार्च को सीमित समय के लिए डोलोत्सव दर्शन

बसंत पंचमी से ब्रज में बहेगा प्रेमरस, 23 जनवरी से श्रीबांकेबिहारीजी करेंगे 41 दिवसीय मदनोत्सव का शुभारम्भ

वृन्दावन। ब्रजभूमि एक बार फिर प्रेम, भक्ति और रंगों के अलौकिक उत्सव में डूबने जा रही है। जन-जन के आराध्य भगवान श्रीबांकेबिहारीजी महाराज बसंत पंचमी पर्व 23 जनवरी को सुगंधित अबीर-गुलाल उड़ाकर विश्वविख्यात 41 दिवसीय मदनोत्सव (फागोत्सव) का विधिवत शुभारम्भ करेंगे। यह दिव्य उत्सव 5 मार्च, चैत्र कृष्णा द्वितीया तक चलेगा, जिसके साथ ही संपूर्ण ब्रजमंडल प्रेमरस, रंग और रास-भक्ति से सराबोर रहेगा।

श्रीहरिदासपीठ मंदिर में आयोजित पत्रकार वार्ता में इतिहासकार एवं सेवापरंपरा के मर्मज्ञ आचार्य प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी महाराज ने जानकारी देते हुए बताया कि बसंत पंचमी से ही ब्रज के प्रमुख मंदिरों में बसंतोत्सव की शुरुआत हो जाएगी। इस दिन श्रीबांकेबिहारीजी महाराज का बसंती पोशाक में भव्य पुष्प श्रृंगार, कपोलों पर गुलाल, सरसों के पुष्पों की गुंथा एवं विशेष भोग अर्पित किया जाएगा। इसके साथ ही मंदिरों में होली पदों का गायन प्रारम्भ हो जाएगा, जिससे ब्रज की गलियों में फाग का उल्लास गूंजने लगेगा।

आचार्य गोस्वामी ने बताया कि 41 दिवसीय मदनोत्सव के दौरान ब्रज के विभिन्न तीर्थों में परंपरागत एवं अद्वितीय होली आयोजन होंगे। इनमें बरसाना और नंदगांव की लठामार होली, दाऊजी का हुरंगा, फालैन की अग्नि होली सहित अनेक रंगीले आयोजन शामिल हैं। इन अलौकिक उत्सवों के साक्षी बनने के लिए हर वर्ष की भांति इस बार भी देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु ब्रजधाम पहुंचेंगे।

इस वर्ष 3 मार्च को पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण पड़ने के कारण श्रीबांकेबिहारी मंदिर में होली से जुड़े कार्यक्रमों में आंशिक परिवर्तन किया गया है। आचार्य प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी महाराज ने बताया कि इसी कारण रंगीली होली का समापन एवं होलिका दहन 2 मार्च, चतुर्दशी की रात्रि में ही सम्पन्न कराया जाएगा।

उन्होंने बताया कि परंपरा के अनुसार होलिका दहन के अगले दिन डोलोत्सव मनाया जाएगा। इस अवसर पर श्रीबांकेबिहारीजी महाराज गुलाबी पोशाक, रत्नजड़ित स्वर्ण आभूषणों से सुसज्जित होकर महाराजा स्वरूप में भक्तों को दर्शन देंगे।

हालांकि चंद्रग्रहण के चलते 3 मार्च को सूतक काल सुबह 9:05 बजे से प्रारम्भ होगा। ऐसे में सूतक से पूर्व तथा ग्रहण मोक्ष के बाद ही सीमित समय के लिए श्रद्धालुओं को डोलोत्सव के दर्शन प्राप्त हो सकेंगे।

आचार्य गोस्वामी ने यह भी बताया कि 5 मार्च, चैत्र कृष्णा द्वितीया से श्रीबांकेबिहारी मंदिर में ग्रीष्मकालीन दर्शन व्यवस्था लागू हो जाएगी। इसके तहत मंदिर के दर्शन समय, भोग-राग एवं शयन सेवा में परिवर्तन किया जाएगा।

ब्रजवासियों और श्रद्धालुओं में मदनोत्सव को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। पूरा ब्रज एक बार फिर श्रीकृष्ण के प्रेम, रंग और रस की दिव्य अनुभूति से सराबोर होने को तैयार है।