16 दिसंबर से खरमास, मांगलिक कार्यों पर लगेगा विराम

ज्योतिषाचार्य पंडित कामेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने जानकारी देते हुए बताया कि 14 दिसम्बर को शुक्र ग्रह अस्त हो रहा है तथा 16 दिसम्बर को सूर्य देव प्रातः 4.20 बजे धनु राशि में प्रवेश कर रहे हैं जिसके कारण खर मास प्रारंभ हो जाएगा और विवाह आदि सभी मांगलिक कार्य नहीं हो सकेंगे । उन्होंने कहा पौष माह में भगवान विष्णु और मां तुलसी का पूजन व सूर्य देव को अर्घ्य देना अत्यंत लाभकारी है। खरमास 16 दिसंबर से 14 जनवरी 2026 तक रहेगा। मकर संक्रांति के बाद ही धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत होगी।

गोष्ठी में आचार्य ब्रजेन्द्र नागर ने कहा कि पौष मास जिसे धनुर्मास भी कहते हैं जिसमें अन्न, वस्त्र,तिल, गुड़,घी और गरम वस्त्रों का दान करने से ग्रहदोष शांत होते हैं और परिवार में आर्थिक उन्नति और मानसिक शांति मिलती है। यह महीना प्रत्येक व्यक्ति को यह सीख देता है कि पूजा पाठ के साथ साथ सामाजिक करुणा व समरसता, परोपकार भी जीवन का अभिन्न हिस्सा है। रामदास चतुर्वेदी शास्त्री एवं नारायण प्रसाद शर्मा ने कहा कि सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करने के कारण रश्मियां मंद हो जाएंगी जिससे कोहरा छाया रहेगा और 16 दिसम्बर तक मध्य भारत में कहीं कहीं बूंदाबांदी का भी योग बनेगा और सर्दी का प्रकोप बढ़ेगा।

इस अवसर पर ज्योतिषाचार्य पंडित दीपक चतुर्वेदी, पंकज चतुर्वेदी ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि खर मास में कोई भी मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए सूर्य देव के धनु राशि में प्रवेश करने एवं शुक्र ग्रह के अस्त होने के पश्चात किए गए मांगलिक कार्य सफल नहीं होते अतः ग्रहों के प्रभाव से बचने के लिए विशेष ध्यान रखें। गोष्ठी में गंगाधर अरोड़ा, हरस्वरुप यादव,शरद चतुर्वेदी साहित्याचार्य,मनोज पाठक, मनीष पाठक, ऋषभ देव, गोविंद देव, प्रियांशु चतुर्वेदी आदि ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पौष मास में अपने परिवार की सुख समृद्धि ऐश्वर्य प्राप्ति के लिए भगवान विष्णु और तुलसी का पूजन करने से आर्थिक उन्नति होती है।भगवत् चर्चा, पूजा पाठ,दान धर्म-कर्म करते रहें और अधिक से अधिक देव दर्शन करें जिससे सभी संकटों का निवारण होगा।