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धर्म

जब मुश्किल में हों प्राण, पढ़ें बजरंगबाण

क्या आप भयंकर मुसीबत से घिरे हैं? क्या परेशानियों से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा? अगर ऐसा है तो बजरंगबली का बजरंगबाण आपकी सहायता कर सकता है। कहा जाता है कि जहां बजरंगबाण का पाठ किया जाता है, वहां हनुमान जी स्वयं आ जाते हैं।…
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जीव का प्रवाह परमात्मा की ओर

नदी का प्रवाह निरंतर समुद्र की ओर ही होता है ठीक इसी प्रकार से परमात्मा के अंश जीव का प्रवाह भी अपने परम पिता परमात्मा की ओर ही निरंतर होता है। नदी अपने मार्ग की कठिनाइयों को सहन करते हुए, ऊंचे-नीचे पथरीले मार्गों के कष्ट को सहती हुई,…
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इनकी कृपा से स्वयं में भगवान देते हैं दर्शन, ऐसे होता है एहसास

-आर.डी. अग्रवाल ‘प्रेमी’- पत्थर से निर्मित मूर्ति की पूजा कब होती है? जब मंत्र शक्ति द्वारा पुरोहित उसमें प्राण प्रतिष्ठित करते हैं। प्राण प्रतिष्ठा होने पर मूर्ति चौतन्य होनी चाहिए, लेकिन नहीं होती, जड़ ही रहती है। मनुष्य जड़ नहीं है,…
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कवर्धा के भोरमदेव मंदिर में करें शिवलिंग के दर्शन, पूरी होगी हर मुराद

छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में 10वीं सदी के भोरमदेव मंदिर में शिवलिंग के दर्शन के बाद सुकून मिलता है। मंदिर देवताओं और मानव आकृतियों की उत्कृष्ट नक्काशी के साथ मूर्तिकला के चमत्कार के कारण सभी की आंखों का तारा है। यहां पूजन करने के लिए हर…
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पूजा कीजिए-उम्र बढ़ाइये

अगर आप प्रतिदिन आधा घंटा पूजा में अपना समय व्यतीत करते हैं तो आपको दिल का दौरा पड़ने की आशंका पचास फीसदी कम हो जाती है। अगर आप ईसाई हैं और नियमित रूप से चर्च जाकर ‘संडे प्रेयर’ में भाग लेते हैं तो आप में तनाव की संभावना साठ से अस्सी…
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शिव ने बनाया जीवन को मधुमय

-श्री श्री आनन्दमूर्ति- सामाजिक क्षेत्र में मनुष्य के बीच जो व्यवधान था, उसे समाप्त कर मानवता के कल्याण के लिए शिव हमेशा प्रयत्नशील रहे। कोमलता व कठोरता के प्रतीक शिव ने मनुष्य को जो सबसे बड़ी वस्तु दी है, वह है धर्मबोध। इस कारण शिव ने…
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प्रह्लाद के गुरु का साधना-स्थल

पूरे देश में महादेव के नौ नाथ की उत्पत्ति-कथा और माहात्म्य बड़ी श्रद्धा से कहे-सुने जाते हैं। ऐसा ही एक शिवालय बिहार के गया क्षेत्र के फतेहपुर अंचल में है, जिसे संडेश्वर नाथ महादेव के नाम से जाना जाता है और उसकी गिनती मगध के नौ नाथों में…
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प्राण और शरीर का योग है जीवन

प्रकृति आनंद से भरीपूरी है लेकिन मनीषियों ने संसार को दुखमय बताया है। दुख और आनंद साथ-साथ नहीं रह सकते। संसार वस्तुतः हमारे मन का सृजन है। प्रकृति सदा से है। आनंद से भरी पूरी होने के कारण ही वह सतत् सृजनरत है। संसार इसी का भाग है। तो भी…
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काबू में रखें कामनाएं

-आचार्य डॉ.लोकेशमुनि- यह एक सत्य है कि शरीर में जितने रोम होते हैं, उनसे भी अधिक होती हैं-इच्छाएं। ये इच्छाएं सागर की उछलती-मचलती तरंगों के समान होती हैं। मन-सागर में प्रतिक्षण उठने वाली लालसाएं वर्षा में बांस की तरह बढ़ती ही चली जाती…
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प्रसन्नता लाता है ध्यान

-श्री श्री रविशंकर- योग की ही अवस्था है ध्यान, जो हमें बहुत से लाभ देता है। पहला लाभ, शांति और प्रसन्नता लाता है। दूसरा, यह सर्वस्व प्रेम का भाव लाता है। तीसरा, सृजनशक्ति और अंतरदृष्टि जगाता है। बच्चे हर किसी को आकर्षित करते हैं,…
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