वृंदावन पहुंचे 2025 बैच के IAS अधिकारी, ब्रज के तीर्थ विकास और सांस्कृतिक वैभव का सीखा ककहरा

​भावी प्रशासनिक अधिकारियों को भाया ब्रज का मॉडल: स्वच्छता महाअभियान और तीर्थ विकास की जमकर की सराहना



​मथुरा/वृंदावन। वर्ष 2025 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के प्रशिक्षु महिला एवं पुरुष अधिकारियों का एक दल सोमवार को शैक्षिक भ्रमण के तहत वृंदावन स्थित गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी पहुँचा। संस्थान के सभागार में आयोजित परिचयात्मक सत्र में इन भावी नीति-निर्माताओं को ब्रज की समृद्ध सांस्कृतिक, धार्मिक विरासत के साथ-साथ यहाँ चल रही पर्यटन व विकास गतिविधियों से विस्तार से परिचित कराया गया।

गीता शोध संस्थान के समन्वयक चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार ने प्रशिक्षु अधिकारियों को बताया कि उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की पहल पर संपूर्ण ब्रज क्षेत्र में व्यापक जनभागीदारी के साथ स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत तीर्थस्थलों, परिक्रमा मार्गों, घाटों और सार्वजनिक स्थलों की नियमित सफाई के साथ जनजागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।
​उन्होंने रविवार को वृंदावन की 11 किलोमीटर लंबी परिक्रमा पर चलाए गए विशेष स्वच्छता महाअभियान का उदाहरण दिया। जिले के तमाम वरिष्ठ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों ने स्वयं झाड़ू थामकर और श्रमदान कर परिक्रमा मार्ग से कूड़ा हटाया। जिले के शीर्ष अधिकारियों की इस जमीनी सक्रियता और सक्रिय भागीदारी की जानकारी लेने में प्रशिक्षु अधिकारियों ने विशेष रुचि दिखाई और वे इससे बेहद प्रभावित नजर आए।

परिचयात्मक सत्र में दल को अवगत कराया गया कि माननीय मुख्यमंत्री जी की अध्यक्षता वाले ‘उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद’ द्वारा भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़े पौराणिक स्थलों, यमुना के प्राचीन घाटों व ऐतिहासिक कुंडों का जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण तेजी से किया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आधुनिक पर्यटन अवसंरचना, टूरिस्ट फैसिलिटेशन सेंटर, पांचजन्य प्रेक्षागृह, श्रीस्वामी हरिदास प्रेक्षागृह और आधा दर्जन मुक्ताकाशीय मंच का निर्माण कराया गया है। संस्थान की गतिविधियों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि यहाँ रासलीला प्रशिक्षण, गीता के प्रेरक कार्यक्रम और साहित्यिक-सांस्कृतिक आयोजन नियमित रूप से होते हैं।

भ्रमण के अंत में सभी प्रशिक्षु आईएएस अधिकारियों ने ब्रज की अद्भुत सांस्कृतिक विरासत, सुनियोजित तीर्थ विकास और स्वच्छता मॉडल की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि फील्ड में तैनात बड़े अधिकारियों को खुद जमीन पर उतरकर काम करते देखना और ब्रज के विकास मॉडल को समझना, उनके प्रशासनिक प्रशिक्षण के लिए एक अत्यंत उपयोगी और यादगार अनुभव साबित होगा।