वी-बी जी राम जी में नाम दिखा, चेहरा/फोटो गायब, पारदर्शिता पर पर्दा? उठे सवाल, बढ़ी निगरानी की चिंता
डिजिटल हाजिरी में फोटो नहीं, पहचान पर बहस, मजदूर का चेहरा भी दिखे, उठी सार्वजनिक मांग
मथुरा । मनरेगा की जगह विकसित भारत जी राम जी नई योजना लागू होते ही मथुरा जिले में पारदर्शिता के दावों की पोल खुल गई है। केंद्र सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था में फेस ऑथेंटिकेशन और बेहतर मॉनिटरिंग से घोटाले रुकेंगे, लेकिन ग्राउंड रियलिटी इससे उलट तस्वीर पेश कर रही है।
पुरानी एनएमएमएस प्रणाली में एमआईएस या दैनिक उपस्थिति पोर्टल पर मस्टर रोल देखते ही मजदूर का नाम और कार्यस्थल पर ली गई उसकी फोटो दोनों सार्वजनिक रूप से दिखाई देते थे। इससे कोई भी नागरिक आसानी से सत्यापन कर सकता था कि वास्तविक श्रमिक मौके पर उपस्थित है या नहीं। लेकिन वी-बी जी राम जी के नए एमआईएस/दैनिक उपस्थिति पोर्टल पर केवल नाम दिख रहे हैं, उपस्थित मजदूर की फोटो पूरी तरह गायब है।
फरह क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता ने चेतावनी देते हुए तर्क और उदाहरण के साथ कहा कि, “राम के नाम से मस्टर रोल जारी हो जाए और कार्यस्थल पर उसके स्थान पर श्याम काम कर ले, तो भुगतान राम के बैंक खाते में चला जाएगा। फोटो न होने से यह साबित करना बेहद कठिन हो जाएगा कि असल में कौन मौजूद था और किसकी उपस्थिति दर्ज की गई।”
उन्होंने बताया कि फोटो सार्वजनिक रखने से सामाजिक निगरानी मजबूत होती है, फर्जी उपस्थिति, प्रतिनिधि मजदूरों और अन्य अनियमितताओं पर अंकुश लगता है। स्थानीय ग्रामीण अब जोरदार मांग कर रहे हैं कि कार्यस्थल पर उपस्थित प्रत्येक मजदूर की लाइव फोटो पब्लिक डोमेन में अनिवार्य रूप से प्रदर्शित की जाए। इससे ग्राम पंचायत से लेकर जिला स्तर तक कोई भी नागरिक वास्तविक उपस्थिति का मिलान कर सकेगा और शत-प्रतिशत पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था का मकसद सिर्फ ऑनलाइन रिकॉर्ड भरना नहीं, बल्कि मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति की पुष्टि करना है। यदि फोटो गायब रखी गई तो यह मनरेगा से भी बदतर स्थिति पैदा कर सकती है।
हालांकि, इस मुद्दे पर संबंधित विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है कि फोटो प्रदर्शित क्यों नहीं हो रही है या इसमें कौन-सा तकनीकी परिवर्तन किया गया है। स्थानीय लोग चाहते हैं कि शासन तुरंत स्थिति स्पष्ट करे और यदि कोई बदलाव हुआ है तो उसके कारण भी जनता के सामने रखे जाएं। मथुरा के गांवों में इस मुद्दे ने तीखी बहस छेड़ दी है। मजदूरों का कहना है कि बिना चेहरे वाली हाजिरी पारदर्शिता नहीं, बल्कि अनियमितताओं को बढ़ावा देने वाली है। अब देखना होगा कि प्रशासन और सरकार इस मांग पर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है।