मुर्शिदाबाद । पश्चिम बंगाल सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए बीएसएफ को 27 किलोमीटर क्षेत्र की जमीन सौंप दी है। गुरुवार को राज्य सचिवालय नबान्ना में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बीएसएफ अधिकारियों की मौजूदगी में भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमा पर कंटीले तारों की बाड़ लगाना राष्ट्रीय सुरक्षा और राज्य की आंतरिक सुरक्षा दोनों के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के असहयोग के कारण लंबे समय तक सीमा सुरक्षा से जुड़ी परियोजनाएं प्रभावित रहीं। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में घुसपैठ, तस्करी, नकली मुद्रा, जबरन धर्मांतरण तथा अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वाले बांग्लादेशी नागरिकों से जुड़े मामलों में लगातार चुनौती बनी हुई है। ऐसे में सीमा प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाना जरूरी हो गया है।
पश्चिम बंगाल की सीमा लगभग 2,200 किलोमीटर तक बांग्लादेश से जुड़ी हुई है। वहीं भारत-बांग्लादेश की कुल अंतरराष्ट्रीय सीमा करीब 4,000 किलोमीटर लंबी है। इनमें से लगभग 1,600 किलोमीटर क्षेत्र में पहले ही फेंसिंग का कार्य पूरा किया जा चुका है जबकि करीब 600 किलोमीटर हिस्सा अब भी बिना बाड़ के है। सरकार द्वारा इस चरण में सौंपी गई 27 किलोमीटर जमीन में से 18 किलोमीटर हिस्से में कंटीले तारों की बाड़ लगाई जाएगी। शेष नौ किलोमीटर क्षेत्र का उपयोग बीएसएफ चौकियों तथा अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में सीमा सुरक्षा परियोजनाओं के लिए और जमीन भी बीएसएफ को उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरी प्रक्रिया पर होने वाला खर्च केंद्र सरकार और बीएसएफ द्वारा वहन किया जाएगा।
इस अवसर पर बीएसएफ के महानिदेशक प्रवीण कुमार ने राज्य सरकार के सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा अभियानों के लिए जिस स्तर के समन्वय की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी वह अब नई व्यवस्था में देखने को मिल रहा है।