नई दिल्ली । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक दशक पहले पार्टी की कमान संभालने के साथ जो बड़ा राजनीतिक चुनावी मिशन शुरू किया था, उसके एक बड़े अध्याय की पूर्णता है पश्चिम बंगाल में भाजपा की एतिहासिक विजय। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शाह ने अपने कार्यकाल और उसके बाद के अध्यक्षों के कार्यकाल में भी उसी गति से अभियान चलाया। इस बार के चुनाव में शाह ने बंगाल में अपनी रणनीति से हर मतदाता तक बदलाव की लहर पैदा की और डर से निकलकर बखौफ मतदान का भरोसा भी दिलाया।
पूर्वोत्तर से कांग्रेस को सत्ता से पूरी तरह से बाहर करने, ओडिशा में भाजपा को लाने, बिहार में भाजपा के व्यापक विस्तार के साथ अपना मुख्यमंत्री बनाने के साथ पश्चिम बंगाल ही ऐसा मिशन था जो पूरा नहीं हो पाया था। इसके लिए पांच साल पहले व्यूह रचना की गई, लेकिन ममता बनर्जी किसी तरह अपना किला बचा ले गई थी, लेकिन इस बार शाह ने उनको कोई मौका नहीं दिया और ममता बनर्जी के अजेय माने जाने वाले किले को ध्वस्त कर दिया। शाह ने संगठन के जरिए अपनी रणनीति को जमीनी अमली जामा पहनाया और ममता बनर्जी के गढ़ों में सेंध लगाई।
शाह की चुनावी यात्रा
सूत्रों के अनुसार चुनाव अभियान के दौरान अमित शाह लगभग 15 दिनों तक किसी न किसी रूप में बंगाल में ही रहे। इस दौरान केवल भाषण और रोड शो ही नहीं किए, संगठन कौ कई स्तरीय रणनीति में इस तरह से ढाला कि भाजपा अपनी एक एक बात मतदाता तक पहुंचाने में सफल रही। चुनाव प्रबंधन भी इस तरह से किया कि कोई भी उसे भेद कर न तो गड़बड़ी कर सका और न ही हिंसा के लिए किसी को गुंजाइश रहने दी। समय रहते ही जैसे को तैसा रवैया अपनाकर साफ कर दिया कि अब भय नहीं चलेगा।
शाह देर रात तक चलने वाली बैठकों में पार्टी नेताओं के साथ रणनीति तय करते और अगले दिन उसी योजना को जमीन पर उतारने में जुट जाते थे। दिन में रैलियों और रोड शो के जरिए व्यापक माहौल बनाया। बीच बीच में दूसरे राज्यों में भी प्रचार करने चले जाते और फिर से लौटकर देर रात बैठकें कर संगठन को धार देने में जुट जाते। इस दौरान उन्होंने लगभग पचास से अधिक रैलियों और रोड शो किए। कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरी और मतदाताओं तक सीधा संदेश पहुंचाया।
चुनाव के दौरान की जाने वाली घोषणाओं का खाका तैयार करने और उनको समयबद्ध ढंग से जारी करने का भी काम किया। शाह की अपनी भरोसेमंद व परखी हुई टीम पूरी कार्य योजना को आगे बढ़ाती रही। चुनाव प्रभारी और कई राज्यों में विपरीत हालातों में भी अपनी सफल रणनीति से भाजपा के सिर सफलता का सेहरा बंधवाने वाले केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बेहद गुपचुप ढंग से मीडिया से दूर रहते हुए काम किया। लोगों में यह धारणा बनाने में सफल रहे कि बंगाल में बदलाव होने जा रहा है। पहले चरण में भारी मतदान व 110 सीटों के आंकड़े को दूसरे चरण में इस तरह से रखा कि पूरा खेल ही बदल गया। यादव के साथ केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, संगठन प्रभारी मंगल पांडे, चुनाव सह प्रभारी विप्लव देव व महासिचव सुनील बंसल ने अपने मोर्चे बेहतर ढंग से संभाले रखे और विरोधियों की सारी रणनीति पर पानी फेरने का काम किया।