नई दिल्ली । महान समाज सुधारक, शोषितों और वंचितों के प्रखर स्वर महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती मनाई जा रही है। इस अवसर पर समाज में समानता और न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान को याद करते हुए पूरा देश उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है। संसद भवन में भी शनिवार को देश के शीर्ष नेतृत्व ने ज्योतिराव फुले को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई केंद्रीय नेताओं ने संसद परिसर में पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस मौके पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, अर्जुन राम मेघवाल और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह भी मौजूद रहे।
सभी नेताओं ने ज्योतिराव फुले के शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समानता के लिए किए गए ऐतिहासिक योगदान को याद किया और उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार ने कहा, “आज महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती है। 15 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी की ओर से लालकिले की प्राचीर से आह्वान किया गया था कि महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती का कार्यक्रम पूरे देश में भव्य तरीके से मनाया जाएगा। शनिवार को संसद परिसर में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और लोकसभा स्पीकर समेत अनेकों नेताओं ने हिस्सा लिया।” वीरेंद्र कुमार ने कहा, “जब शिक्षा पर सिर्फ कुछ लोगों का अधिकार था, बेटियों को शिक्षा से वंचित रखा जाता था, उस समय में महात्मा फुले ने समता, समानता और सभी के लिए शिक्षा के अधिकार की बात की। उन्होंने अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले के माध्यम से पहले बालिका विद्यालय शुरू कराया। इसके लिए उन्हें समाज का काफी विरोध भी झेलना पड़ा, लेकिन महात्मा फुले ने सारे विरोध को दरकिनार करते हुए बालिका शिक्षा को आगे बढ़ाया। वे बंधु, जो शिक्षा से दूर रह गए, उन्हें भी इससे जुड़ने का अवसर दिया गया।”
उन्होंने आगे कहा, “आज 200 साल निकल जाने के बावजूद भी महात्मा फुले और सावित्रीबाई फुले की ओर से जलाई गई अलख आज भी दिलों में एक क्रांति की भांति जल रही है। उनकी जयंती को पूरे देश में उत्साह के साथ मनाया जा रहा है।” केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा, “महात्मा फुले ने एक सत्य सोधक समाज की स्थापना की थी। सत्य और महिला सशक्तिकरण उनके जीवन में महत्वपूर्ण था। महिला शिक्षा का प्रचार प्रसार उन्होंने अपने जीवन में किया। सावित्रीबाई फुले को इस देश की पहली महिला शिक्षिका होने का भी गर्व पूरा समाज और देश करता है। ये काम भी महात्मा फूले जी ने किया। उन्होंने सावित्रीबाई फुले को पढ़ाने और स्कूल खोलने की अनुमति दी। महात्मा फुले का एक बड़ा व्यक्तित्व था।”