मथुरा। विवाह समारोह में फायरिंग, मारपीट और पुलिस से अभद्रता के मामले में फरार चल रहे पूर्व पार्षद चौधरी तिलक वीर को मथुरा पुलिस की एसओजी टीम ने नोएडा से गिरफ्तार कर लिया। उसके साथ कुछ परिजन और सहयोगियों को भी हिरासत में लिया गया है। देर शाम सभी को मथुरा कोतवाली लाया गया जहां उनसे पूछताछ जारी है। परिजनों को छोड़ दिया गया है। पुलिस ने तिलक वीर चौधरी पुत्र राजवीर, राजीव पुत्र राजवीर, रवि उर्फ राजू पुत्र मोहन श्याम, गिरीश रावत पुत्र हरिप्रसाद, सौदान सिंह को गिरफ्तार किया हैं।
घटना 12 मार्च की है जब कोतवाली क्षेत्र स्थित बीएसए कॉलेज के पीछे सियाराम वाटिका में एक विवाह समारोह के दौरान तिलक वीर और उसके साथियों ने बारातियों के साथ विवाद करते हुए मारपीट और फायरिंग की थी। इस गोलीबारी में एक महिला घायल हो गई थी जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई थी।
सूचना पर पहुंची पुलिस टीम के साथ भी आरोपियों ने धक्का-मुक्की और अभद्रता की थी। इतना ही नहीं पुलिस द्वारा जब्त की गई पिस्तौल को भी छीन लिया गया था जिससे मामला और गंभीर हो गया।
घटना के बाद से ही पुलिस तिलक वीर और उसके साथियों की तलाश में जुटी थी। पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी द्वारा उसके दोनों शस्त्र लाइसेंस निलंबित कर दिए गए थे और हथियार जमा करा लिए गए थे। लगातार फोन सर्विलांस के जरिए पुलिस उसकी लोकेशन ट्रेस करने में लगी थी।
करीब तीन सप्ताह बाद एसओजी टीम को सूचना मिली कि तिलक वीर नोएडा में छिपा हुआ है और उससे मिलने उसके परिजन मां, छोटे भाई की पत्नी और उसकी पत्नी पार्षद रेनू चौधरी वहां पहुंचे हैं। इसी दौरान टीम ने दबिश देकर सभी को हिरासत में ले लिया।
फिलहाल सहायक पुलिस अधीक्षक (आईपीएस) आसना चौधरी द्वारा कोतवाली में बंद कमरे में आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, तिलक वीर को उसके सहयोगियों ने कई बार कोर्ट में आत्मसमर्पण करने की सलाह दी थी लेकिन वह लगातार फरार रहकर बचने की कोशिश करता रहा। तिलक वीर की गिरफ्तारी की खबर पूरे शहर में तेजी से फैल गई है और इसे पुलिस की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
दबाव के बावजूद नहीं झुके एसएसपी श्लोक कुमार, गिरफ्तारी से दिया सख्त संदेश
विवाह समारोह में फायरिंग और उपद्रव के मामले में पूर्व पार्षद तिलक वीर चौधरी की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस पर भारी दबाव बनाए जाने की चर्चाएं सामने आई हैं। सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तारी से बचाने के लिए कई आईएएस-आईपीएस अधिकारियों के साथ-साथ विभिन्न राजनीतिक दलों के लोगों द्वारा भी प्रयास किए गए, लेकिन मथुरा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने किसी भी प्रकार के दबाव के आगे झुकने से साफ इनकार कर दिया।
बताया जा रहा है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने शुरू से ही सख्त रुख अपनाया और स्पष्ट निर्देश दिए कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। इसी के चलते पुलिस टीम ने लगातार प्रयास जारी रखे और अंततः एसओजी की मदद से आरोपी को नोएडा से गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस महकमे में एसएसपी श्लोक कुमार की इस कार्रवाई को एक मजबूत संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि अपराध चाहे कोई भी करे, उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई तय है।
इस घटनाक्रम ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि मथुरा पुलिस कानून व्यवस्था को लेकर पूरी तरह गंभीर है और किसी भी प्रकार के बाहरी दबाव के बावजूद निष्पक्ष कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है।