मथुरा से अयोध्या रवाना हुआ दिव्य प्रसाद, निकली भव्य शोभायात्रा, गूंजे जय श्रीराम-राधे कृष्ण

मथुरा। भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा से सोमवार को श्रीकृष्ण जन्मभूमि द्वारा अयोध्या धाम स्थित श्रीराम जन्मभूमि के लिए भव्य प्रसाद रवाना किया गया। गाजे-बाजे, भक्ति संगीत और श्रद्धा के उत्साह के बीच निकली इस शोभायात्रा ने पूरे शहर को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया।
सोमवार सुबह करीब 10 बजे श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर से सुसज्जित वाहन में प्रसाद को विधिवत पूजन-अर्चन के बाद रवाना किया गया। इस अवसर पर 11 मन धनिया की पंजीरी, सवा मन लड्डू, पंचमेवा, फल, भगवान श्रीराम के लिए वस्त्र-श्रृंगार और सुगंधित दिव्य सामग्री विशेष रूप से भेजी गई।
प्रसाद यात्रा अन्न सेवा धाम से प्रारंभ होकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों और श्री राधा-कृष्ण के सजीव स्वरूपों के साथ निकाली गई। भक्त नाचते-गाते “राधे-राधे” और “जय श्रीराम” के जयघोष करते हुए केशव देव मंदिर और भागवत भवन के दर्शन करते हुए यात्रा में शामिल हुए। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत-महंत और सनातनी समाज के लोग मौजूद रहे जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
इस अवसर पर श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने कहा कि भगवान राम और भगवान कृष्ण एक ही दिव्य शक्ति के दो स्वरूप हैं। यह आयोजन सनातन धर्म की एकता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि अयोध्या में आयोजित भव्य रामनवमी महोत्सव के लिए यह प्रसाद विशेष रूप से भेजा गया है जिसे रामलला के जन्मोत्सव पर अर्पित किया जाएगा।
कपिल शर्मा ने जानकारी दी कि केवल प्रसाद ही नहीं बल्कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान के सिद्धहस्त हलवाई और कारीगर भी अयोध्या भेजे गए हैं। ये कारीगर वहां श्रीराम जन्मभूमि की रसोई में अपने हाथों से ठाकुरजी के लिए विशेष धनिया की पंजीरी और अन्य भोग तैयार करेंगे।
उन्होंने इसे “अध्यात्म की त्रिवेणी” बताते हुए कहा कि जिस प्रकार जन्माष्टमी पर अयोध्या और काशी से मथुरा प्रसाद आता है उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अब मथुरा से अयोध्या के लिए यह सौगात भेजी गई है। यह आयोजन राम, कृष्ण और शिव की एकात्मकता का जीवंत उदाहरण बनकर सनातन धर्म की जड़ों को और अधिक सशक्त करता है।