शर्मनाक: मथुरा में ‘डबल इंजन’ की हवा निकली, कीचड़ से होकर गुजरी अंतिम यात्रा !
मटमैले दावों की खुली पोल: 5 विधायक, 2 सांसद... फिर भी विजयगढ़ी के नसीब में सिर्फ नारकीय जीवन
मथुरा (मांट)। उत्तर प्रदेश की ‘डबल इंजन’ सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करते नहीं थकती, लेकिन मथुरा के मांट विधानसभा अंतर्गत अंतिम गांव विजयगढ़ी की जमीनी हकीकत इन दावों के परखच्चे उड़ा रही है। आलम यह है कि गाँव के मुख्य मार्ग पर विकास का ‘पहिया’ नहीं, बल्कि कीचड़ और बदहाली का राज है। राजनीति के नाम पर अपनी रोटियां सेंकने वाले दिग्गजों की फौज होने के बावजूद, यहाँ के लोग नरक जैसी स्थिति में रहने को मजबूर हैं।
हैरानी की बात यह है कि जिस जनपद से सांसद ‘ड्रीम गर्ल’ हेमा मालिनी, राज्यसभा सांसद तेजवीर सिंह, विधान परिषद सदस्य योगेश नौहवार और क्षेत्रीय विधायक राजेश चौधरी (विकास का पहिया) जैसे कद्दावर नेता सत्ता की कुर्सी पर बैठे हैं, उसी क्षेत्र के एक गाँव को श्मशान तक जाने के लिए रास्ता मयस्सर नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय वादे करने वाले ये नेता अब अपनी सुध खो चुके हैं।
हाल ही में गाँव में हुई एक मृत्यु ने व्यवस्था के मुंह पर करारा तमाचा जड़ा है। विजयगढ़ी में न तो व्यवस्थित श्मशान घाट है और न ही वहां तक जाने का रास्ता। मजबूरी में परिजनों को मृतक के शव को घुटनों तक भरे कीचड़ और गंदे पानी से होकर ले जाना पड़ा। यह मंजर देखकर हर किसी की रूह कांप गई, लेकिन स्थानीय प्रशासन और जन प्रतिनिधियों की नींद नहीं टूटी।
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने तहसील से लेकर जिले के उच्चाधिकारियों तक कई बार लिखित शिकायतें और आपत्तियां दर्ज कराईं, लेकिन स्थिति ‘जस की तस’ बनी हुई है। ऐसा प्रतीत होता है कि शासन-प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। सरकारी फाइलों में चमकता विकास विजयगढ़ी की कीचड़ वाली गलियों में आकर दम तोड़ देता है।
नेता सिर्फ वोट के समय चेहरा दिखाते हैं। क्या यही वह रामराज्य है जिसका वादा किया गया था? जहां इंसान को मरने के बाद सम्मानजनक अंतिम विदाई तक नसीब नहीं हो रही!
— आक्रोशित ग्रामीण, विजयगढ़ी