मथुरा। ताज ट्रैपेज़ियम ज़ोन (टीटीजेड) की वर्षों पुरानी सख़्त पाबंदियों से पहले ही जूझ रहा मथुरा का व्यापार अब नीरी (नेशनल एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट) की नई आपत्तियों के चलते गंभीर संकट में फँस गया है। हालात ऐसे बन चुके हैं कि व्यापारी भय और अनिश्चितता के माहौल में कारोबार करने को मजबूर हैं। उत्तर प्रदेश युवा व्यापार मंडल ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते संतुलित और व्यावहारिक निर्णय नहीं लिए गए तो मथुरा का पारंपरिक उद्योग और व्यापार ढांचा बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
उत्तर प्रदेश युवा व्यापार मंडल के प्रदेश महामंत्री सचिन चतुर्वेदी ने कहा कि व्यापारी समाज ने हमेशा कानून और पर्यावरण संरक्षण का सम्मान किया है, लेकिन लगातार बढ़ती पाबंदियाँ अब व्यापार के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े कर रही हैं। उन्होंने बताया कि टीटीजेड के चलते पहले से ही नए निर्माण, व्यापारिक विस्तार और निवेश पर गंभीर असर पड़ा है, वहीं नीरी की रिपोर्टों के बाद वर्षों पुराने प्रतिष्ठान भी संदेह के घेरे में आ गए हैं।
सचिन चतुर्वेदी के अनुसार इससे हज़ारों परिवारों की रोज़ी-रोटी पर सीधा संकट मंडरा रहा है। व्यापार मंडल द्वारा शासन और प्रशासन से लगातार संवाद तथा ज्ञापन सौंपे जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यापारी समाज पर्यावरण का विरोधी नहीं है, लेकिन एकतरफ़ा निर्णय स्वीकार्य नहीं हो सकते।
व्यापार मंडल ने उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से मांग की है कि टीटीजेड और नीरी की पाबंदियों की ज़मीनी और व्यावहारिक समीक्षा कर स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिए जाएँ तथा व्यापारी समाज को समाधान प्रक्रिया में सहभागी बनाया जाए।
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