सुप्रीम कोर्ट के टेट निर्णय पर प्रतिनिधिमंडल ने की केंद्रीय शिक्षा मंत्री से भेंट

नई दिल्ली। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से भेंट कर शिक्षक पात्रता परीक्षा से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय के 01 सितंबर 2025 के निर्णय के संदर्भ में एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने नियुक्ति तिथि की परवाह किए बिना सभी सेवारत शिक्षकों पर टेट अनिवार्य किए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की।

महासंघ ने कहा कि यदि इस निर्णय को पूर्वव्यापी रूप से लागू किया गया तो देशभर के लगभग 12 लाख शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा, वरिष्ठता, पदोन्नति एवं आजीविका पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री का ध्यान एन सी टी ई की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना की ओर आकृष्ट कराते हुए बताया कि शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यताएँ अधिसूचना की तिथि से ही प्रभावी मानी गई थीं तथा इससे पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टेट से छूट प्रदान की गई थी। ऐसे में वर्षों से वैध योग्यताओं के आधार पर सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों पर इस निर्णय को पूर्वव्यापी रूप से लागू करना न्यायोचित नहीं होगा।

महासंघ ने मंत्री से आग्रह किया कि निर्णय को केवल भावी रूप से लागू किया जाए तथा अधिसूचना से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की वरिष्ठता, गरिमा और वैध अपेक्षाओं की रक्षा सुनिश्चित की जाए। साथ ही शिक्षकों को संभावित सेवा-समाप्ति एवं पदोन्नति से वंचित होने से बचाने के लिए आवश्यक विधिक एवं प्रशासनिक कदम उठाने की मांग की गई।

इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक का स्वागत करते हुए उसके उद्देश्यों की सराहना की तथा विधेयक को अधिक प्रभावी, समावेशी और व्यवहारिक बनाने हेतु कुछ महत्वपूर्ण सुधारात्मक सुझाव भी प्रस्तुत किए। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा एवं विद्यालय शिक्षा से जुड़ी विभिन्न दीर्घकाल से लंबित समस्याओं के समाधान को लेकर एक विस्तृत मांग-पत्र भी सौंपा गया।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने संगठन द्वारा प्रस्तुत तथ्यों और दस्तावेजों को गंभीरता से संज्ञान में लेते हुए समुचित कार्यवाही के निर्देश दिए। उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ-साथ शिक्षकों एवं शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े विषयों पर संतुलित और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का आश्वासन दिया।

प्रतिनिधिमंडल में संघ के अध्यक्ष प्रो. नारायण लाल गुप्ता, महासचिव प्रो. गीता भट्ट, संगठन मंत्री महेंद्र कपूर, सह संगठन मंत्री जी. लक्ष्मण, वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेंद्र कुमार, विद्यालय शिक्षा प्रभारी शिवानंद सिंदनकेरा, एनआईटी शिक्षक फोरम के संयोजक प्रो. महेंद्र श्रीमाली, तेलंगाना इकाई के अध्यक्ष हनुमंत राव तथा तमिलनाडु इकाई देसीय अस्ररियार संगम के महासचिव कंदसामी शामिल रहे।

वहीं उत्तर प्रदेश से राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रो. संजय मेधावी, प्रदेश महामंत्री जोगेन्द्र पाल सिंह, प्राथमिक संवर्ग अध्यक्ष शिवशंकर सिंह, महामंत्री प्रदीप तिवारी, कोषाध्यक्ष नीलमणि शुक्ला, मंत्री डॉ. श्वेता, मीडिया प्रमुख बृजेश श्रीवास्तव, संयुक्त मंत्री सोनल शर्मा, प्रियंका शुक्ला, रविन्द्र पंवार सहित अन्य पदाधिकारियों ने राष्ट्रीय नेतृत्व की इस पहल की सराहना की।