खौफजदा हैं आपदा की त्रासदी के दृश्य, सुरक्षित करना होगा भविष्य

आपदा की त्रासदी के दृश्य बहुत ही खौफजदा हैं भविष्य को सुरक्षित करना होगा। आपदा से सबक सीखने होगें तभी असमय होने वाली बाढ़ की घटनाओं को रोका जा सकता है। देवभूमि हिमाचल में ये आपदाओं की घटनाएं नई नहीं हैं सदियां गवाह हैं कि पहले भी देवभूमि में भयंकर आपदाऐं आती थी तबाही लाती थी लंकिन मानवीय तबाही नहीं होती थी क्योंकि तब आबादी कम थी गिने चुने कच्चे घर होतें थे जमीनें खाली थी पानी की निकासी आसानी से होती थी। प्रदेश में कंक्रीट के जंगल बन रहे हैं। जल इक्कठा होने से जलप्रलय होता है और जनजीवन अस्त व्यस्त हो जाता है। अवैध खनन से खडडों का स्वरुप बदल गया है। हर जगह नदी नालों के किनारे मकानों का निर्माण हो गया है। खनन हो रहा है फोरलेन के लिय पहाड़ों को अवैज्ञानिक तरीके से काटा जा रहा है। प्रकृति से अंधाधुध छेड़छाड़ हो रही है। नदियां अपना रास्ता बदल रही है और बेहिसाब तबाही मचा रही हैं। छोटे छोटे नाले भी तबाही मचा रहे है। बरसात के पानी की निकासी अवरुद्व होती जा रही है नतीजन तबाही होना स्वाभविक है। बीते सालों 2018 2022 2023 2024 में हुई तबाहीयों के जख्म अभी तक नहीं भर पाए हैं चार वर्षौं से तबाही ही तबाही हो रही है। गत वर्ष 2024 में आनी के निरमंड में बादल फटने से समेज गांव में बहुत त्रासदी हुई जहां 45 लोग बेमौत मारे गए थे। 2025 में सैंज के पंग्लीयूर में एक ही परिवार के नौ लोग मारे गए है। आनी में भी एक ही परिवार के आठ लोग मकान के जमींदोज होने से जिंदा दफन हो गए । 2025 की बेरहम बरसात हिमाचल को गहरे व अमिट जख्म दे गई। जख्म तो भर जाएंगें मगर निशान अमिट रहेगें। प्रतिवर्ष मानवीय त्रासदियां हो रही हैं 2025 की बरसात सदियों तक याद रहेगी। सराज से शुरु हुए बरसात का आगाज का बहुत ही खौफनाक अंजाम हर जिला भुगत रहा है। 30 जून 2025 से लेकर 20 सितंबर तक बरसात का कहर बरपता रहा अभी कहीं कहीं छिटपुट बरसात हो रही है। सितंबर 2025 तक, हिमाचल प्रदेश में मानसून के कारण 46 बादल फटने 98 अचानक बाढ़ और 146 बड़े भूस्खलन की घटनाओं में कम से कम 424 लोगों की मौत हुई है और लगभग 481 लोग घायल हुए हैं।

प्रदेश को 4500 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है और 15022 संरचनाओं को क्षति हुई है जिसमें 1502 घर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए हैं। लाचता हुए लोग अभी तक नहीं मिल रहे हैं। भयावह त्रासदी के बाद अब जीवन पटरी पर लौटने लगा है। त्रासदी में खोये अपनों के गम में रात दिन रोते रहे लोगों की आखों के आंसू सूख चुके हैं आखें पथरा गई हैं क्योकि आखों के सामने सब उजड़ गया आशियाने उजड़ चुके हैं। अपनों को खोने का गम क्या होता है यह वही जान सकता है जिसने आखों के सामने अपनों को बहते देखा हो। तिनका तिनका बिखरा है अब मुआबजा मिलेगा तभी नए आशियाने बन सकते हैं। उम्र भर की पसीने की कमाई से बनाए घर तबाह हाक गए। पल भर में सब तबाह हो गया आलिशान आशियाने मिटटी में मिल गए अब मलवे के ढेर ही बचे हैं। जो बीत गया है वह बीत गया अब आपदा से बचने के लिए नदी नालों के किनारे निर्माण पर पूर्ण पावदीं लगानी होगी ताकि जीवन बच सके। नये सिरे से जीवन शुरु करना होगा तबाही का मंजर याद आता है तो आत्मा सिहर उठती है। हिमाचल में किन्नौर से लेकर भरमौर तक बरसात का कहर जारी रहा। सैंकडों लोग असमय ही काल के गाल में समा गए। देवभूमि में प्रकृति ने काफी खौफनाक तांडव किया। अगस्त से सितंबर तक बरसात ने खौफनाक रौद्र रुप दिखाए है। बरसात जिंदगियां लील रही है। सैंकडों लोग मौत के आगोश में समा चुके है। आशियाने जमींदोज हो चुके हैं। बरसात ने लोगों को एक बार फिर रौद्र रुप दिखाकर तबाही का मंजर दिखाया। बरसात में कहीं भूस्खलन हो रहा था तो कहीं पहाड़ दरक रहे थे। इस विनाशकारी प्रकृति के कहर से जनमानस खौफजदा था। प्रदेश की संडकें धंस रही थी। गांड़ियां फिसल रही थी मकान जमीदोज हो रहे थे परिवार के परिवार खत्म हो रहे थे। चारों तरफ चीत्कार मची हुई थी। मानसून का कहर लोगों को मौत गया हिमाचल प्रदेश को अब तक करोडों का नुक्सान हो चुका है।

भूस्खलन व बरसात के कहर सेे प्रदेश में अब तक काफी लोग मारे जा चुके प्रदेश में हर जिला में लोगों के कच्चे व पक्के मकान जमींदोज हो चुके है। कुल्लु, मण्डी व किन्नौर में भी काफी नुक्सान हुआ है। प्रकृति ने एक बार फिर अपना तांड़व मचाया है। इससे पहले हिमाचल में प्रकृति के कहर से हजारों लोग मारे जा चुके हैं। बरसात में प्रदेश में कई भीषण त्रासदियां हो चूकी है। कहीं मकानों के ढहने से बच्चे मारे गए तो कहीं सैंकडों पशुओं की दबकर मौत हो गइ र्है। दर्जनों लोग पानी में बह गए और करोडों की संपति तबाह हो गई। पहाड के मलवे की चपेट में आने से काफी जानमाल का नुक्सान हो रहा है। प्रकृति की इस विभिषिका में हजारों लोग अपंग हो गए है बच्चे अनाथ हो जाते है लाशे मलवे में दफन हो गई है। सरकार को चाहिए की प्रत्येक गांव से लेकर शहरो तक आपदा प्रबंधन कमेटियां गठित करनी चाहिए जिसमें डाक्टर नर्स व अन्य प्रशिक्षित स्टाफ रखना चाहिए ताकि व त्वरित कारवाई करके लोगों केा मौत के मुंह से बचा सके। अक्सर देखा गया है कि जब तक आपदा प्रबंधन की टीमें घटना स्थनों पर पहुचती है तब तक बची हुई सासें उखड़ जाती है लाशों के ढेर लग जाते है। अगर समय पर आपदा ग्रस्त लोगों को प्राथमिक सहायता मिल जाए तो हजारों जिदंगियां बचाई जा सकती हैं। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए सरकार को कालेजों व स्कूलों में भी माकड्रिल जैसे आयोजन करने चाहिए ताकि अचानक होने वाली आपदाओं से अपना व अन्य का बचाव किया जा सके। स्कूलो व कालेजों मे चल रहे राष्ट्रय सेवा योजना व स्काउट एंड गाइड के स्वंयसेवियों को आपदा से निपटने के लिए पारगंत किया जाए। अगर यही स्वयसेवी अपने घर व गांवों में लोगों को आपदा से बचने के तरीके बताए तो काफी हद तक नुक्सान को कम किया जा सकता है। सरकार को चाहिए कि आपदा से बचाव के लिए प्रत्येक विभाग के कर्मचारियों को पूर्वाभ्यास करवाया जाए ताकि समय पर काम आ सके।