मथुरा। शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता को बढ़ावा देने लिए 17 सित से 02 अक्टू तक स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम के तहत नगर निगम मथुरा-वृन्दावन द्वारा निरन्तर अभियान चलाकर प्रतिबंधित पाॅलीथिन जब्त करने के साथ जुर्माने की कार्यवाही निरन्तर की जा रही है।
इसी क्रम में बायो डिग्रेडेबल पाॅलीथिन के प्रयोग किये जाने वाले क्षेत्र में अभिनव प्रयास करते हुये नगर निगम क्षेत्रान्तर्गत बायो डिग्रेडेबल पाॅलीथिन का निर्माण, विक्रय एवं अधिक से अधिक प्रयोग किये जाने हेतु संस्था को अधिकृत किया गया है। नगर निगम मथुरा-वृन्दावन के जनरलगंज स्थित सभागार में महापौर और नगर आयुक्त द्वारा बायो डिग्रेडेबल बैग की लांचिग की गयी।
इस अवसर पर महापौर विनोद अग्रवाल द्वारा बताया गया कि इस आयोजन में व्यापार संगठनों एवं मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। उनके माध्यम से जन-जन तक यह सदेंश पहुंचे ही प्रतिबंधित पाॅलीथिन के स्थान पर बायो डिग्रेडेबल बैग का उपयोग अधिक से अधिक किया जाये।
लांचिंग अवसर पर नगर आयुक्त शशांक चौधरी ने कहा कि वर्तमान में प्लास्टिक का उपयोग अधिक हो रहा है, ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि साल 2025 तक कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन करीब 15 प्रतिशत बढ़ जाएगा। इससे निपटने के लिए बायो प्लास्टिक का इस्तेमाल करना बहुत ही जरूरी है। बायोप्लास्टिक पौधों पर आधारित प्लास्टिक है जो आसानी से नष्ट हो जाता है। इस प्लास्टिक का उपयोग पैकेजिंग इंडस्ट्री में अधिक किया जा रहा है क्योंकि इससे बने प्रोडक्ट पर्यावरण को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। इस हेतु नगर निगम मथुरा-वृन्दावन द्वारा अभिनव पहल करते हुये बायोडिग्रेडेबल बैग के निर्माण एवं विक्रय हेतु संस्था को अधिकृत किया गया है।
नगर आयुक्त श्री चौधरी ने स्थानीय जनता तथा बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं से अनुरोध किया गया है कि सिंगल यूज प्लास्टिक एवं प्रतिबंधित पाॅलीथिन का प्रयोग किसी भी दशा में न करें। प्रतिबंधित पाॅलीथिन के जगह बायो बैग का अधिक से अधिक प्रयोग करें। उन्होंने व्यापार मण्डल एवं स्वयं सेवा संस्थाओं से अनुरोध किया गया कि वह भी अधिक से अधिक बायो बैग का प्रयोग किये जाने हेतु प्रचार-प्रसार करें।
कार्यक्रम में उधोगपति विपिन सिंघल समाजसेवी गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी पार्षद लक्ष्मन सैनी विकास दिवाकर पार्षद प्रतिनिधि तिलकवीर चौधरी सुनील साहनी व्यापार मण्डल आदि के अलावा अनिल कुमार अपर नगर आयुक्त अनुज कौशिक सहायक नगर आयुक्त गोपाल गर्ग नगर स्वास्थ्य अधिकारी जितेन्द्र सिंह जोनल सेनेटरी ऑफीसर महेशचन्द जोनल सेनेटरी आफिसर आदि उपस्थित रहे।
बायो बैग की विशेषताएं
प्लास्टिक का अल्टरनेट-बायो बैग
90 दिनों के उपरान्त यह खाद्य बन जाती है।
यह आपको 149.83 प्रति किलो उपलब्ध है।
यह बायो बैग जीव-जन्तुओं (गाय) के लिये भोजन का कार्य करता है।
नाले-नाली में मीथेन के सम्पर्क में आने पर घुल जाता है।
यह सी.पी.सी.वी. द्वारा मान्यता प्राप्त है।
यह नगर निगम के सभी जोनल कार्यालयों में उपलब्ध है।
यह मक्के के स्टार्च से बनता है।
इसको दूध, चाय, दही, सब्जी, सांबर आदि में यूज किया जा सकता है।
इसमें गर्म व ठण्डे पदार्थ से किसी भी प्रकार की रासायनिक किया नहीं होती है।
इससे किसी भी प्रकार की कैंसर जैसी घातक बीमारिया भी नहीं होतीं।
इस बायो बैग का उपयोग डस्टबिन बैग, कैरी बैग, ग्रौसरी बैग इत्यादि के रूप में किया जाता है।
ये बैग पौधे-आधारित सामग्रियों जैसे कि वनस्तलि तेल और खाद बनाने योग्य पॉलिमर से बने होते हैं।
ये बैग पर्यावरण के अनुकूल होते हैं और प्रदूषण एवं कचरे को कम करने में मदद करते हैं।
ये बैग आसानी से विघटित हो जाते हैं।
ये बैग आसानी से रीसायकल किये जा सकते हैं।
ये बैग गैर बिषाक्त होते हैं।
इन बैग की मदद से पेट्रोलियम पर निर्भरता कम होती है और कार्बन पदचिन्ह में कटौती होती है।
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