Vrindavan: 500 वर्ष पुराने श्यामाश्याम मन्दिर के विधिवत पट 27 नवंबर को खुलेंगे

मथुरा । महाप्रभु बल्लभाचार्य के शिष्य छीत स्वामी द्वारा निर्मित श्यामाश्याम मन्दिर के जीर्णोद्धार का काम पूरा होने के कारण 27 नवंबर से मन्दिर के पट श्रद्धालुओं के लिए विधिवत खोल दिए जाएंगे। 500 वर्ष पुराने इस मन्दिर की हालत बहुत जीर्णशीर्ण हो गई थी तथा श्याम घाट पर स्थित इस मन्दिर के जीर्णोद्धार की आवश्यकता महसूस की जा रही थी किंतु धनाभाव के कारण जीर्णोद्धार कार्य नही हो पा रहा था। मन्दिर की अनन्य भक्त सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इसके लिए प्रयास किया और नागार्जुन फाउन्डेशन के एन आर अल्लूरी इसके जीर्णोद्धार के लिए न केवल तैयार हो गए बल्कि उन्होंने धनराशि आबंटित की जिससे जीर्णोद्धार का काम 7 महीने में पूरा हुआ। अब इस मन्दिर के जीर्णाद्धार कार्य के पूरे होने के बाद इसका उदघाटन जाने माने शिव सेना नेता शिव सेना की युवा इकाई युवा सेना के राष्ट्रीय, अध्यक्ष आदित्य ठाकरे 27 नवंबर को करेंगे।

सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के युगल स्वरूप को समर्पित इस मन्दिर की स्थापना यद्यपि 500 वर्ष पहले महाप्रभु बल्लभाचार्य के अष्ट सखाओं में से एक छीतस्वामी ने की थी किंतु इसका विस्तार बाद में विट्ठलनाथ जैसे महान वैष्णव एवं उनके उत्तराधिकारियों ने किया। 500 वर्ष के समृद्ध इतिहास को अपने अन्दर समेटै इस मन्दिर की मान्यता पुष्टिमार्ग परंपरा के रूप में भी है जिसे वैष्णवाद के तहत बल्लभ सम्प्रदाय के तौर पर भी मान्यता है। यह मन्दिर रूद्र संप्रदाय उप परंपरा से जुड़े श्रद्धालुओं के लिए विशेष स्थान रखता है।वर्तमान में मन्दिर की सेवा पूजा का कार्य छीतस्वामी के वंशजों द्वारा किया जाता है।

मंदिर के सेवायत आचार्य मुकेश स्वामी ने बताया कि महाप्रभु बल्लभाचार्य ने भगवान श्रीकृष्ण के भक्ति आंदोलन में योगदान देने और ब्रजभाषा को बढ़ावा देने के लिए जिन अष्ट सखाओं ( 8 रत्नों ) को नियुक्त किया था उन्ही अष्ट सखाओं में से एक छीतस्वामी भी थे।उन्होंने बताया कि मन्दिर के जीर्णोद्धार के दौरान श्यामाश्याम की सेवा विधिवत चलती रही। उन्होंने यह भी बताया कि मन्दिर में महिलाओं का प्रवेश मन्दिर की चैक तथा जगमोहन तक ही सीमित है। उन्होने बताया कि इस मन्दिर को बनवाने की भावना छीतस्वामी मंे बिट्ठलनाथ से मिलने एवं उनके चमत्कार देखने के बाद मिली ।अन्दर ब्रज चैरासी कोस परिक्रमा पर श्याम घाट पर स्थित इस मन्दिर का श्यामा श्याम विगृह इतना जीवन्त है कि जो भी इस मन्दिर में पूरी भक्ति भाव से आता है वह यहां से कभी निराश होकर नही जाता है।