महिला पहलवानों का आंदोलन और सरकार

-सनत जैन-
अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार विजेता महिला पहलवान पिछले 6 माह से यौन उत्पीड़न के खिलाफ अपनी आवाज उठा रही हैं। खेल मंत्रालय से जब इस मामले में खिलाड़ियों को कोई राहत नहीं मिली, तो महिला पहलवान जंतर मंतर में बैठकर धरना प्रदर्शन कर रहे थे। लगभग 35 दिनों तक यह धरना प्रदर्शन चला। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। पास्को एक्ट में भी मामला दर्ज हुआ। लेकिन अभी तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई। पास्को एक्ट में तुरंत गिरफ्तारी किए जाने का प्रावधान है। दिल्ली पुलिस जांच के नाम पर आरोपी बृजभूषण सिंह पर कोई कार्यवाही नहीं की। जिससे आंदोलनकारी पहलवानों को यह संदेश गया की सरकार बृजभूषण सिंह को बचाने में लगी है। आंदोलनकारी महिला पहलवान बृजभूषण सिंह की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े है। सरकार और दिल्ली पुलिस की ओर से ऐसे कोई प्रयास नहीं किए गए,जिससे महिला पहलवानों को यह लगता, कि उनके मामले में सही जांच हो रही है। उल्टे महिला पहलवानों को यह एहसास कराया गया, कि कुश्ती संघ के अध्यक्ष एवं सांसद बृजभूषण सिंह को बचाने के लिए सरकार का संरक्षण और दिल्ली पुलिस पर बृजभूषण सिंह को बचाने का दबाव है। यौन उत्पीड़न महिला पहलवानों का लगातार पिछले कई माहों से किया जा रहा था। आमतौर पर ऐसी शिकायतें महिलाओं और लड़कियों द्वारा करना संभव नहीं होता है। महिला पहलवान कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण सिंह से इस कदर परेशान हो गई, कि जब यौन उत्पीड़न सहना मुश्किल हो गया, तब जाकर उन्होंने यह बदनामी मोल लेने का जोखिम उठाया। कुस्ती संघ के अध्यक्ष ब्रजभूषण शरण सिंह, महिला पहलवानों के खिलाफ बयान देकर उन्हें भड़काने का काम करते रहे। पिछले 35 दिनों में समाज के सभी वर्गों का समर्थन महिला खिलाड़ियों को मिला। सभी राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा महिला खिलाड़ियों को समर्थन दिया। इतने गंभीर आरोप लगने के बाद भी कुश्ती संघ को अध्यक्ष पद से बर्खास्त नहीं किया। जब उसका कार्यकाल समाप्त हो गया, तब नए चुनाव कराने की घोषणा कर दी। कुश्ती संघ के चुनाव की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हुई।
28 मई को संसद भवन का उद्घाटन होना था। विरोध प्रदर्शन करने के लिए महिला खिलाड़ी संसद भवन की ओर जाना चाहते थे। पुलिस द्वारा जिस तरह से महिला पहलवानों की गिरफ्तारी की गई। उसकी देश और विदेशों में निंदा हो रही है। जंतर मंतर से पुलिस ने उनका धरना हटा दिया गया। नाराज और हताश महिला पहलवान अपने मैडल गंगा मैया को समर्पित करने हरिद्वार पहुंच गए। संयुक्त किसान मोर्चा के राकेश टिकैत की पहल पर खिलाड़ियों ने मेडल प्रवाहित नहीं किए और अपने मैडल उन्हें सौंप दिए। बुधवार को आश्चर्यजनक घटनाक्रम हुआ। एएनआई न्यूज़ एजेंसी द्वारा दिल्ली पुलिस के हवाले से एक ट्वीट किया। जिसमें कहा गया कि दिल्ली पुलिस को बृजभूषण सिंह के खिलाफ कोई प्रमाण नहीं मिले। इस ट्वीट के बाद दिल्ली पुलिस ने न्यूज़ एजेंसी के ट्वीट का खंडन किया। दिल्ली पुलिस ने न्यूज एजेंसी के ट्वीट का खण्डन अपने ट्वीट में किया, कि अभी जांच चल रही है। पुलिस ने अपना ट्वीट कुछ मिनटों में हटा भी लिया। इसके बाद मीडिया में बृजभूषण शरण सिंह के बेगुनाह होने की बातें जोर शोर से प्रसारित होने लगी। खेल मंत्रालय ने भी स्थिति स्पष्ट कर दी, कि जांच के बाद ही पुलिस और खेल मंत्रालय कार्रवाई करेगा। इन सारी स्थितियों को देखते हुए यह मामला एक बार फिर तूल पकड़ता हुआ दिख रहा है। किसान संयुक्त मोर्चा ने 5 दिन का समय बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी के लिए अल्टीमेटम दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा के नेता राष्ट्रपति को मिलकर ज्ञापन देने दिल्ली पहुंच रहे हैं। गिरफ्तारी नहीं हुई,तो यह मामला किसान आंदोलन से भी जुड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट जाने के बाद भी खिलाड़ियों को न्याय नहीं मिल रहा है। इतने संवेदनशील मामले में सरकार की हठधर्मिता ने महिला पहलवानों की करो या मरो की स्थिति पर लाकर खड़ा कर दिया है। दोनों ही पक्ष अपने कदम हटाने को तैयार नहीं है। महिला खिलाड़ियों को दिल्ली पुलिस के ऊपर विश्वास नहीं रहा। इस आंदोलन का असर युवाओं और महिलाओं पर होता हुआ दिख रहा है। कुछ ही महीने में हिंदीभाषी राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की छवि महिलाओं और युवाओं में खराब हो रही है। इसके बाद भी सरकार इस मामले को लेकर संवेदनशील नहीं है। महिला पहलवानों को खाप पंचायत और संयुक्त किसान मोर्चा का समर्थन प्राप्त है। ऐसी स्थिति में यह मामला आगे चलकर बड़ा स्वरूप ले सकता है। पास्को एक्ट में एफआईआर दर्ज होने के बाद भी, गिरफ्तारी नहीं होने से न्यायपालिका की छबि पर विपरीत असर जनमानस पर हो रहा है।