नारायण दास, पप्पन सेठ, आदित्य चौधरी सहित सैकड़ों लोगों ने बिहारी जी मंदिर दुर्घटना प्रकरण में कराये ब्यान दर्ज
वृंदावन। बिहारी जी मंदिर हादसे की जांच कर रही जांच कमेटी ने दूसरे दिन भी पर्यटक सुविधा केंद्र पर काफी संख्या में लोगों के बयान दर्ज किए। अनुमान के मुताबिक कल और आज मिलाकर करीब 400 लोगों ने बयान दर्ज कराए हैं।
जीएलए विश्वविद्यालय के कुलपति नारायण दास अग्रवाल ने जांच कमेटी के अध्यक्ष पूर्व डी जी पी सुलखान सिंह और सदस्य अलीगढ़ मंडल के कमिश्नर गौरव दयाल को लिखित में अवगत कराया कि बिहारी जी मंदिर पर भीड़ का दबाव कम करने के लिए वारह घाट पर खुली पार्किंग की व्यवस्था होनी चाहिए वहीं से पल्ली पार के लिए एक पुल निकाला जाए जिसको परिक्रमा मार्ग से कनेक्ट किया जाए इसी रास्ते को एक्सप्रेस वे से भी जोड़ दिया जाए। इस व्यवस्था से वृंदावन में काफी हद तक वाहनों पर नियंत्रण किया जा सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि बिहारी जी मंदिर पर सामने की ओर कारीडोर बनाया जाए और स्थानीय लोगों की सुगमता के लिए एक हैंगिंग ब्रिज की भी आवश्यकता पर बल दिया।
समाजसेवी आदित्य चौधरी ने कहा कि जांच कमेटी को मेरा सुझाव है कि बिहारी जी मंदिर के लिए जो व्यवस्था बनाई जाए वह सन 2050 के हिसाब से बनाई जाए क्योंकि बीते 25 साल में देश की आबादी करीब डेढ़ गुना बढ़ी है और उसी अनुपात में कई गुना वृंदावन में यात्रियों का आवागमन बड़ा है। वृंदावन की भव्यता और सुंदर स्वरूप के लिए मास्टर प्लान बनाकर कार्य किए जाने चाहिए।
श्री ग्रुप के निदेशक सुदीप अग्रवाल पप्पन ने लिखित में अवगत कराया कि वीआईपी रोड के पास टूरिस्ट फैसिलिटेशन सेंटर बनाया जाए जहां यात्रियों को सभी प्रकार की प्राथमिक सुविधाएं उपलब्ध हों और वहीं से स्टील की रेलिंग लगाकर उनको मंदिर की ओर भेजा जाए। सेंटर पर करीब 25000 लोगों की व्यवस्था हो और उन्हें क्रमानुसार मंदिर की ओर भेजा जाए। मंदिर में भी रेलिंग की जिकजैक व्यवस्था बहुत आवश्यक है। समूचे मंदिर प्रांगण को एक लेवल में समतल किया जाए ताकि लोगों को दर्शन के दौरान चलने फिरने में आसानी हो सके ।
भाजपा नेता संजय गोविल ने सुझाव दिया कि मंदिर परिसर को कारीडोर बनने की व्यवस्था से पूर्व वर्तमान में सिस्टम को सही करने के लिए मंदिर प्रांगण को चौड़ा करना बहुत ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भीड़ को नियंत्रण करने के लिए बिहारी जी मंदिर के आंगन में लगी रेलिंग को हटाकर स्टील की जिकजैक रेलिंग लगाई जाएं और सावन माह में फूल बंगला के दौरान जिस तरह ठाकुरजी चबूतरे पर विराजते हैं उसी तरह हमेशा के लिए उनके दर्शन की व्यवस्था की जाए ताकि लोग किसी भी स्थल पर खड़े होकर उनके अलौकिक दर्शन का लाभ उठा सकें।
उज्जवल ब्रज संस्था के सचिव अनंत शर्मा ने सुझाव दिया कि मंदिर की व्यवस्था बनाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को पावर मिलनी चाहिए । मास्टर प्लान बनाकर कारीडोर बनना चाहिए। इनके अलावा काफी संख्या में तीर्थ पुरोहित पंडा सहित गोवर्धन के भागवताचार्य पूरन कौशिक भाजपा नेता हरिओम शर्मा ठाकुर गजेंद्र पाल सिंह रवी लोचन दास आदि ने भी अपने लिखित में बयान दर्ज कराए।
कमेटी के अध्यक्ष पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह ने बताया कि वह कल काशी विश्वनाथ जाएंगे वहां वह कारीडोर व्यवस्था का स्थलीय निरीक्षण करेंगे। उन्होंने बताया कि जांच रिपोर्ट करीब 20 दिन में शासन को उपलब्ध करा दी जाएगी। उनका मानना है कि इस तरह बड़ी संख्या में लोगों ने बिहारी जी मंदिर की जो सुझाव उपलब्ध कराए हैं वह वास्तव में काफी जन उपयोगी है। जांच कमेटी के सदस्य आईएएस कमिश्नर गौरव दयाल का कहना था कि मंदिर में तात्कालिक व्यवस्था कराने के लिए प्रशासन को अधिकार होने चाहिए। यहां श्राइन बोर्ड की महती आवश्यकता है।