मथुरा। आतंक और खौफ का पर्याय बन चुके बंदरों को पकड़ने के मामले में नगर निगम की कलई खुल गई है शिथिल कार्य प्रणाली के चलते निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले आधी संख्या में ही बंदर पकड़े जा सके। अब वन विभाग से पुन: अनुमति मिलने के पश्चात अभियान चलाया जाएगा।
वन विभाग ने मथुरा में बंदर पकड़ने के लिए नगर निगम को दो हजार की संख्या में अनुमति दी थी जिसकी समय अवधि 15 सितंबर तक थी। सूत्रों के अनुसार नियत तिथि तक 2000 में से मात्र 12 स्थानों से केवल 1054 बंदर ही पकड़े जा सके ।
नगर निगम ने दावा किया था कि वह 2000 बंदर नियत अवधि तक पकड़कर चंबल के बीहड़ में छोड़ देगा। वृंदावन में यह अभियान अभी तक नहीं चलाया गया है वहां की स्थिति मथुरा से भी अधिक विकराल है। ज्ञात रहे कि मथुरा में बंदर पकड़ने को लेकर 7 सितंबर से होली गेट पर अनशन प्रारंभ होना था जिसके चलते आनन-फानन में नगर निगम में तत्काल अभियान शुरू कर दिया। निगम के बंदर पकड़ो अभियान चलाए जाने से अनशन का समाप्ति का ऐलान हो गया। इसमें खास बात यह रही कि अधिकांश बंदर उन क्षेत्रों में ही पकड़े गए जहां अनशन का ऐलान करने वाले समाजसेवी रहते थे।