मथुरा में दीपावली के बाद आंदोलन करेंगे व्यापारी
जवाहर हाट के विस्थापित परिवारों को मालिकाना हक देने की मांग, अपर नगर आयुक्त को दी चेतावनी
मथुरा । नगर निगम द्वारा व्यापारियों की 16 सूत्रीय मांगों पर एक महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी कार्रवाई न किए जाने और जवाहर हाट में बसाए गए विस्थापित परिवारों की दुकानों व मकानों को फ्रीहोल्ड न किए जाने से व्यापारियों में रोष व्याप्त है। इसी को लेकर महानगर अध्यक्ष सुनील अग्रवाल और महामंत्री शशिभानु गर्ग के नेतृत्व में व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल ने अपर नगर आयुक्त अनिल कुमार सिंह से मुलाकात कर अपनी नाराजगी जताई। व्यापारियों ने दो टूक चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो दीपावली के बाद नगर निगम के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी निगम प्रशासन की होगी।
नगर निगम कार्यालय पहुंचे व्यापारी प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि पूर्व नगर आयुक्त जगप्रवेश के कार्यकाल से व्यापारियों की 16 सूत्रीय मांगें लंबित हैं। तत्कालीन नगर आयुक्त और निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ व्यापार मंडल की बैठक में सभी मांगों का शीघ्र निस्तारण करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन एक महीने से अधिक समय गुजरने के बाद भी किसी मांग पर ठोस प्रगति दिखाई नहीं दे रही है। इससे व्यापारी और आम जनता परेशान हैं। व्यापारियों ने स्पष्ट कहा कि अब आश्वासनों से काम नहीं चलेगा और मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
इस दौरान जवाहर हाट व्यावसायिक समिति के अध्यक्ष एवं नगर उपाध्यक्ष गुरमुख दास, समिति के महामंत्री जितेंद्र सेठी, सरदार मंजीत सिंह और तुलसीदास गंगवानी ने जवाहर हाट में विस्थापित परिवारों के स्वामित्व का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1950 में पाकिस्तान से आए शरणार्थी परिवारों को जवाहर हाट में बसाया गया था। वर्ष 1960 में पूल प्रॉपर्टी घोषित होने के बाद तत्कालीन पालिका अध्यक्ष बांकेबिहारी माहेश्वरी की अध्यक्षता में 16 मार्च 1960 को हुई बोर्ड बैठक में प्रस्ताव संख्या 21 के तहत बहुमत से इन परिवारों को स्वामित्व सौंपने का प्रस्ताव पारित किया गया था।
प्रतिनिधियों के अनुसार वर्ष 2005 में तत्कालीन पालिका अध्यक्ष रविंद्र पांडे के कार्यकाल में 1960 के प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए शरणार्थी परिवारों को स्वामित्व पत्र भी सौंपे गए थे। इसके अलावा वर्ष 1990 से 2005 के बीच इन परिवारों से अलग-अलग हाउस टैक्स और वाटर टैक्स के रूप में कुल 3 लाख 88 हजार रुपये जमा कराए गए। इसके बावजूद परिवारों को आज तक मालिकाना हक नहीं मिल सका है।
उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर विस्थापित परिवारों ने महापौर विनोद अग्रवाल से भी गुहार लगाई थी। महापौर की अध्यक्षता में 13 सितंबर 2024 को हुई नगर निगम बोर्ड बैठक में प्रस्ताव संख्या 24 के माध्यम से वर्ष 1960 में पारित प्रस्ताव का बहुमत से समर्थन किया गया था। इसके बावजूद स्वामित्व का मामला अब तक लंबित है। प्रतिनिधियों ने इस संबंध में वर्ष 1994 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देने के साथ ही बताया कि अपर जिला न्यायाधीश ने भी 22 सितंबर 2026 को इस मामले में आदेश जारी किया है।
व्यापारी प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि विस्थापित परिवारों से वर्ष 2005 के बाद का बकाया टैक्स जमा कराकर स्वामित्व संबंधी रजिस्टर में उनकी प्रविष्टि की जाए और उन्हें विधिवत मालिकाना हक प्रदान किया जाए। प्रतिनिधिमंडल ने अपर नगर आयुक्त से लंबित मांगों पर जल्द निर्णय लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि नगर निगम ने अब भी गंभीरता नहीं दिखाई तो दीपावली के बाद व्यापारी अपने आंदोलन को व्यापक रूप देंगे।