नशे में उड़ता पंजाब

पंजाब को भारत का अन्न भंडार कहा जाता है तो इसके पीछे ठोस कारण हैं। देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र में महज लगभग डेढ़ प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला यह राज्य खाद्यान्न उत्पादन और केंद्रीय पूल में गेहूं-चावल की आपूर्ति में असाधारण योगदान देता है। हरित क्रांति की सफलता से लेकर आज तक पंजाब के किसानों ने देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कृषि के साथ दूध, शहद और मशरूम उत्पादन में भी पंजाब की उल्लेखनीय हिस्सेदारी है। खेती की ऊंची सघनता और प्रति हेक्टेयर बेहतर उत्पादन ने पंजाब को देश की कृषि व्यवस्था का मजबूत आधार बनाया है। विडंबना यह है कि इतने बड़े योगदान के बावजूद आज पंजाब की पहचान को लगातार नशे के मुद्दे से जोड़कर देखा जा रहा है। पंजाब में नशे की समस्या है और इसे किसी भी तरह नकारा नहीं जा सकता।

चिट्टा, हेरोइन, अफीम और अन्य मादक पदार्थों की तस्करी तथा इनके सेवन ने राज्य के एक हिस्से के सामने गंभीर चुनौती खड़ी की है। लेकिन किसी सामाजिक समस्या को पूरे राज्य की पहचान बना देना न तो उचित है और न ही समस्या का समाधान। फरवरी 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों से पहले नशा अब पंजाब की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। भाजपा ने सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों में नशा मुक्ति यात्रा निकालकर इसे अपने प्रमुख चुनावी एजेंडे में शामिल किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पंजाब में भाजपा की सरकार बनने पर दिसंबर 2029 तक राज्य को नशे के कारोबार से मुक्त करने का दावा कर चुके हैं। दूसरी ओर आम आदमी पार्टी केंद्र पर पंजाब को बदनाम करने का आरोप लगाती है और देश के अन्य राज्यों में पकड़ी जाने वाली बड़ी मात्रा में नशीली सामग्री का हवाला देकर सीमा और बंदरगाहों की निगरानी पर सवाल उठाती है। यानी नशे की समस्या अब जनस्वास्थ्य और सामाजिक संकट से आगे बढ़कर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हथियार बन चुकी है। पंजाब में नशे के फैलाव के पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण हैं। कृषि संकट, घटती कृषि आय, उद्योगों की कमी, बेरोजगारी और युवाओं में बढ़ती निराशा इसके महत्वपूर्ण कारण हैं। विदेश जाने की होड़ भी एक अलग सामाजिक दबाव पैदा कर रही है। वीजा न लगने, विदेश जाने में असफल होने या ठगी का शिकार होने वाले युवाओं में मानसिक तनाव और भविष्य को लेकर निराशा बढ़ सकती है। ऐसी परिस्थितियां नशे की ओर धकेलने वाले कारणों में बदल जाती हैं।

भौगोलिक स्थिति भी पंजाब को नशीले पदार्थों की तस्करी के लिहाज से संवेदनशील बनाती है। पाकिस्तान से लगी लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा के कारण सीमा पार से मादक पदार्थों की तस्करी की चुनौती बनी हुई है। ड्रोन के माध्यम से नशीली सामग्री भेजे जाने के मामले इस खतरे को और गंभीर बनाते हैं। सीमा पार से आने वाली खेप को रोकना केवल राज्य सरकार की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। सीमा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय तस्करी रोकने में केंद्र सरकार तथा उसकी सुरक्षा एजेंसियों की भी उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका है। पंजाब को नशे से मुक्त करने की जरूरत पर कोई दो राय नहीं हो सकती। लेकिन इसके लिए राजनीतिक नारों से अधिक ठोस रणनीति चाहिए। तस्करों और बड़े कारोबारियों पर कठोर कार्रवाई के साथ युवाओं के लिए रोजगार, उद्योग, शिक्षा, खेल और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करना होगा। नशे के आदी लोगों को अपराधी मानकर केवल जेल भेजना समाधान नहीं है। उन्हें उपचार, पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा में वापस लाने की व्यवस्था भी करनी होगी।