आजादी का मतलब अधिकार के साथ कर्तव्य भी

15 अगस्त केवल ध्वजारोहण और राष्ट्रगान का दिन नहीं है। यह उस स्वतंत्रता को याद करने और आत्ममंथन करने का अवसर है जिसके लिए असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना जीवन न्योछावर कर दिया। 1947 में देश को राजनीतिक आजादी मिली लेकिन स्वतंत्रता का वास्तविक उद्देश्य ऐसा भारत बनाना था जहां हर नागरिक को सम्मान न्याय समानता और अवसर मिल सके। आजादी के इतने वर्षों बाद हमारे सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हमने स्वतंत्रता के अधिकारों के साथ अपनी जिम्मेदारियों को भी समझा है। लोकतंत्र केवल चुनाव और सरकार बनाने की व्यवस्था नहीं है। इसकी मजबूती जनता की भागीदारी सरकार की जवाबदेही और असहमति के सम्मान से होती है। सरकार से सवाल करना लोकतांत्रिक अधिकार है लेकिन संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मर्यादा बनाए रखना भी नागरिक और राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।

आज सोशल मीडिया ने हर व्यक्ति को अपनी बात रखने की ताकत दी है लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी भी बढ़ी है। बिना सत्यापन के झूठी खबरें और अफवाहें फैलाना सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा बन सकता है। स्वतंत्रता का अर्थ मनमानी नहीं बल्कि विवेक के साथ अपने अधिकारों का इस्तेमाल करना है। भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता में छिपी एकता है। अलग-अलग भाषाओं धर्मों संस्कृतियों और परंपराओं के बावजूद हम एक राष्ट्र हैं। जाति धर्म और क्षेत्र के नाम पर नफरत तथा विभाजन की राजनीति देश की इस ताकत को कमजोर करती है। राजनीतिक और वैचारिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं लेकिन राष्ट्रहित इन मतभेदों से ऊपर होना चाहिए। आजादी का सपना गरीबी अशिक्षा और शोषण से मुक्ति का भी था। देश ने विकास के क्षेत्र में लंबी यात्रा तय की है लेकिन विकास की असली कसौटी यही है कि उसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक कितना पहुंचा। किसान मजदूर युवा महिलाएं और कमजोर वर्ग यदि विकास की मुख्यधारा से पीछे रह जाते हैं तो प्रगति अधूरी मानी जाएगी। शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार और समान अवसर आज भी हमारी बड़ी प्राथमिकताएं हैं। देश की स्वतंत्रता की रक्षा केवल सीमा पर तैनात सैनिक नहीं करते। किसान खेत में मेहनत करके शिक्षक शिक्षा देकर वैज्ञानिक नई खोज करके श्रमिक उत्पादन करके चिकित्सक सेवा देकर और पत्रकार सच सामने लाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देते हैं। हर नागरिक का ईमानदार प्रयास देश को मजबूत बनाता है।

सच्ची देशभक्ति केवल तिरंगा फहराने तक सीमित नहीं हो सकती। कानून का पालन करना सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना भ्रष्टाचार को बढ़ावा न देना महिलाओं का सम्मान करना और दूसरे नागरिक के अधिकारों का सम्मान करना भी देशभक्ति है। देश की कमियों पर सवाल उठाना और उन्हें सुधारने का प्रयास करना भी राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी है। 15 अगस्त हमें यह संकल्प लेने का अवसर देता है कि हम नफरत की जगह संवाद को विभाजन की जगह एकता को और हिंसा की जगह शांति को प्राथमिकता देंगे। अपने अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को समझेंगे और संविधान तथा लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करेंगे। आजादी हमें विरासत में मिली है लेकिन उसकी रक्षा हर पीढ़ी को स्वयं करनी होगी। स्वतंत्रता दिवस का वास्तविक सम्मान तभी होगा जब देश का प्रत्येक नागरिक यह समझे कि भारत से उसे क्या मिला यह महत्वपूर्ण है लेकिन उससे भी बड़ा सवाल यह है कि उसने भारत को क्या दिया।