मथुरा। सनसिटी हाईटेक प्रोजेक्ट को लेकर जिले में विवाद लगातार गहराता जा रहा है। सोमवार को बड़ी संख्या में किसानों और ग्रामीणों ने लाल झंडों के साथ मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण (एमवीडीए) कार्यालय पर प्रदर्शन कर जांच की मांग उठाई। मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है।
प्रदर्शन के दौरान छटीकरा और जैत क्षेत्र के किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल एमवीडीए कार्यालय पहुंचा और अधिकारियों को विस्तृत ज्ञापन सौंपा। किसानों का नेतृत्व नरेंद्र सिंह, श्याम, दीवान सिंह और प्रेमबाबू ने किया।
किसानों ने आरोप लगाया कि सनसिटी हाईटेक प्रोजेक्ट्स प्रा. लि. और इसके हाउसिंग प्रोजेक्ट ‘सनसिटी अनन्तम’ के माध्यम से प्रशासनिक मिलीभगत के चलते नियम-कानूनों को दरकिनार कर किसानों की जमीनें हड़पी गईं। उनका कहना है कि वर्ष 2005 में 10 लाख आबादी के मानक पूरे न होने के बावजूद कंपनी को चयन पत्र जारी कर दिया गया और मात्र 11 दिनों में सहायक कंपनी बनाकर जमीनों को सस्ते दामों में लेने का समझौता कर लिया गया।
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 4 और 17 का इस्तेमाल कर अधिग्रहण का माहौल बनाया गया, लेकिन लंबे समय तक धारा 6 का प्रकाशन नहीं किया गया। बाद में वर्ष 2015 में योजना को कालबाधित बताकर रद्द कर दिया गया, जबकि इस बीच कंपनी ने सीधे किसानों से कम कीमत पर जमीन खरीद ली।
किसानों ने यह भी कहा कि वर्ष 2007 में अपर जिलाधिकारी द्वारा कंपनी को स्टाम्प शुल्क में छूट के लिए अपात्र घोषित किए जाने के बावजूद एमवीडीए ने वर्ष 2012 तक प्रमाण पत्र जारी किए। इसके अलावा चकबंदी विभाग पर भी नियमों के उल्लंघन करते हुए कंपनी के नाम पर दाखिल-खारिज करने का आरोप लगाया गया।
ज्ञापन में एक ही पते पर कई कंपनियों के पंजीकरण, एक ही प्रतिनिधि के नाम पावर ऑफ अटॉर्नी के उपयोग तथा अनुसूचित जाति के लोगों की जमीन खरीद से जुड़े अनुमति पत्रों की गहन जांच की मांग की गई है।
किसान प्रतिनिधियों ने मांग की है कि सनसिटी हाईटेक प्रोजेक्ट्स प्रा. लि. और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ पद के दुरुपयोग और धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया जाए। साथ ही कंपनी का पंजीकरण निरस्त कर प्रभावित किसानों को उनकी मूल जमीन वापस दिलाई जाए।
सूत्रों के अनुसार इसी भूमि प्रकरण को लेकर एक आईएएस अधिकारी का तबादला भी चर्चा का विषय बना हुआ है हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।