रिफाइनरी टाउनशिप में सुरक्षा पर सवाल, जर्जर क्वार्टरों में रहना बना जोखिम

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मथुरा। इंडियन ऑयल मथुरा रिफाइनरी टाउनशिप में रह रहे कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए आवासीय क्वार्टर अब किसी खतरे से कम नहीं रह गए हैं। करीब चार दशक पुराने ये रिहाइशी परिसर समय के साथ जर्जर हो चुके हैं, जिससे यहां रहने वाले लोगों की जान-माल पर लगातार खतरा बना हुआ है।

हाल ही में बारिश के दौरान कई क्वार्टरों के छज्जों से प्लास्टर गिरने की घटनाएं सामने आईं, जिनमें घरेलू सामान को नुकसान पहुंचा। राहत की बात यह रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन इन घटनाओं ने टाउनशिप निवासियों में भय का माहौल पैदा कर दिया है। अब टाउनशिप की सुरक्षा और रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

सूत्रों के अनुसार वर्ष 2023 में टाउनशिप क्वार्टरों की आरएलए रिपोर्ट तैयार कराई गई थी, जिसमें कई सेक्टरों और मकानों को ‘रहने योग्य नहीं’ माना गया था। इसके बावजूद कर्मचारियों का उन क्वार्टरों में रहना जारी है, जिससे प्रबंधन की कार्यप्रणाली और लागत कटौती की नीतियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

लगातार हो रही घटनाओं के बाद अब प्रबंधन हरकत में आया है और क्वार्टरों की मजबूती की दोबारा जांच कराने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए आईआईटी रुड़की से नई आरएलए रिपोर्ट तैयार कराई जाएगी। हालांकि स्थानीय निवासियों में संशय बना हुआ है कि पहले से असुरक्षित घोषित किए गए क्वार्टर क्या इस बार सुरक्षित पाए जाएंगे।

निवासियों का कहना है कि अधिकांश मकान करीब 40 वर्ष पुराने हैं। प्रबंधन द्वारा चरणबद्ध तरीके से पुराने क्वार्टरों को गिराकर नए निर्माण का कार्य किया जा रहा है, लेकिन जब तक सभी को सुरक्षित आवास उपलब्ध नहीं हो जाते, तब तक इन जर्जर भवनों में रहना मजबूरी और खतरे से भरा हुआ है। अब सभी की नजरें आगामी आरएलए रिपोर्ट और प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी हैं।