भारत की मीडिया बायस्ड हुई, कोई शक नहीं फिर भी देश में मीडिया पूरी तरह स्वतंत्र : रजत शर्मा एडिटर इन चीफ इंडिया टीवी

पत्रकार को होना चाहिए देश और सत्य के साथ: अनंत विजय
मथुरा। धर्म नगरी मथुरा में सेवाज्ञ संस्थानम् और जीएलए यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी युवा धर्म संसद 2023 के दूसरे दिन संवाद सत्र में ‘सिनेमा और पत्रकारिता में देश’ विषय पर गंभीर चर्चा में भाग लेने देश के वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा मथुरा आये। संगोष्ठी में भाग लेने के उपरांत उन्होंने वृंदावन में बिहारी जी के दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया।

संगोष्ठी में इंडिया टीवी के चेयरमैन और एडिटर इन चीफ रजत शर्मा ने कहा कि भारत की मीडिया बायस्ड हुई, इसमें कोई दो राय नहीं है लेकिन जनता अपने हितों की बात करने वाले चैनल को पहचान लेती है। जो लोग विश्वसनीय होंगे उन्हें जनता का प्यार मिलेगा, जो अपनी विश्वसनीयता नहीं बनाए रखेंगे वे पीछे रह जाएंगे। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के पुत्र और मंत्री उदयनिधि स्टालिन द्वारा सनातन धर्म पर विवादित बयान पर उन्होंने कहा कि सनातन की निंदा को सहा नहीं जा सकता। सनातन सबको साथ लेकर चलने की बात करता है। उन्होंने कहा कि जो लोग सनातन धर्म का सर्वनाश की बात करें जनता को चाहिए कि उनका सर्वनाश कर दे। हमारे देश में मीडिया को पूरी तरह स्वतंत्रता मिली है।

कार्यक्रम में उन्होंने उन्होंने अपने संघर्षों को याद किया। सफलता और असफलता के बीच समभाव रखने की सीख देते हुए उन्होंने बताया कि बचपन में श्रीमद्भगवदगीता आदि जो सुना और पढ़ा उसने संघर्ष करने की ताकत दी। मेरे पिता जी कहते थे कि सुविधाओं से भरा आदमी तो खुश रह ही लेगा तुम चुनौती, अभाव और तकलीफों में खुश रहना सीखो।
वरिष्ठ स्तंभकार अनंत विजय ने कहा कि पत्रकार को देश और सत्य के साथ होना चाहिए। जनपक्षधरता होना और निष्पक्षता में विरोधाभास है। कोई निष्पक्ष नहीं हो सकता, सबको पक्ष चुनना होता है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का मूल धर्म है कि सत्य को समग्रता में बताया जाए।
उन्होंने कहा कि पश्चिम का अंधानुकरण करते हुए इंटरनेट मीडिया को सोशल मीडिया न कहा जाए। इंटरनेट मीडिया को अराजकता का माध्यम बताते हुए उन्होंने कहा कि वहां न कोई संपादक है, न एग्जीक्यूटिव संपादक और न ही समाचार संपादक। उन्होंने कहा कि इन माध्यमों को प्रेस कहना बंद किया जाए। सिनेमा में देश विषय पर अपनी बात रखते हुए वरिष्ठ साहित्यकार यतींद्र मिश्र ने कहा कि सिनेमा में साहित्य, संगीत, लेखन, संवाद सब समाहित होते हैं। सिनेमा में नवों रसों का भाव है। फिल्म में भारतीयता की बात करते हुए उन्होंने बताया कि सांताराम को पीछे रखने के लिए तत्कालीन साम्यवादी फिल्म निर्माताओं और निर्देशकों ने भरपूर कोशिश की।
फिल्म निर्माण पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि कला में एजेंडा डाले बिना, संदर्भ से छेड़छाड़ किए बिना फिल्मों का निर्माण होगी तो सक्सेज होगी।