मथुरा में आम नागरिक ने खोजी 450 साल पुरानी शेरशाह सूरी की कोस मीनार

मथुरा। वर्षों से पुरातत्व विभाग द्वारा खोजी जा रही शेरशाह सूरी के समय की कोस मीनार मथुरा की पॉश कॉलोनी मोती कुँज एक्सटेंशन में पायी गयी है। उक्त मीनार को एक समुदाय विशेष के लोगों ने सैय्यद मजार और कमरे का निर्माण कर छुपाया हुआ था। स्थानीय जागरूक नागरिक राम मूरत उपाध्याय द्वारा खोज निकाला गया है। इसकी सूचना पर पुरातत्व विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई।
इस संदर्भ में कॉलोनी निवासी श्री उपाध्याय ने जानकारी दी कि जब उन्हें इसकी जानकारी हुई तो उनके द्वारा भारत की इस अमूल्य एवं ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन को सूचित किया गया। सूचना के आधार पर उप जिलाधिकारी सदर द्वारा मौके पर पहुंच कर सैय्यद मजार में स्थित कोस मीनार का निरीक्षण किया गया। इस दौरान कोस मीनार पर अवैध कब्जा कर रहे लोगों को जगह खाली करने का उपजिलाधिकारी द्वारा मौखिक निर्देश भी दिया गया। इसी बीच उनके द्वारा तत्परता दिखाते हुए पुरातत्व विभाग को भी सुचना दे दी गयी। कोस मीनार पर निजी कब्जे की सूचना मिलते ही पुरातत्त्व विभाग के अधिकारी सतीश कुमार अपनी टीम के साथ मौके पर पहुँचे गये। कोस मीनार को देख कर पुरात्व विभाग की टीम हतप्रभ रह गई। विभागीय अधिकारी श्री कुमार ने बताया कि पुरातत्व विभाग की एक कोस मीनार कई वर्षो से गायब है, जिसकी खोजबीन कई वर्षों से हो रही थी। पुरातत्व विभाग की टीम द्वारा स्थल का गहन निरिक्षण किया गया। निरीक्षण के पश्चात पुरातत्व विभाग द्वारा पुष्टि कर दी गई है कि यह वही कोस मीनार है जिसे विगत कई वर्षों से खोजा जा रहा था। श्री उपाध्याय द्वारा बताया गया कि जिस जगह मीनार है यह किसी समय मिर्जापुर ग्राम पंचायत की जमीन थी जो थान सैय्यद के रूप में दर्ज है जिसकी पेमाइश खतौनी में 0.0810 हेक्टेयर (968 वर्गगज) है। अब यह भूमि छावनी परिषद के अंतगर्त आती है। यहां कई यादव परिवारों के पूर्वजों के थान बने हुए है। वह आज भी प्रति वर्ष अपने पूर्वजों के थान को पूजने आते है।