आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर कदम

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, पश्चिम एशिया संकट, बढ़ती महंगाई और ऊर्जा असंतुलन के इस दौर में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा देशवासियों से बचत बढ़ाने, अनावश्यक खर्चों से बचने और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की अपील अत्यंत दूरदर्शी और समयानुकूल प्रतीत होती है। पेट्रोल-डीजल की बचत, गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से परहेज, वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा, विदेशी डेस्टिनेशन वेडिंग से बचाव तथा एक वर्ष तक गैर-जरूरी सोना नहीं खरीदने जैसी सलाहें केवल व्यक्तिगत खर्च कम करने की बातें नहीं हैं, बल्कि देश की आर्थिक स्थिरता
और विदेशी मुद्रा संरक्षण से जुड़ी राष्ट्रीय आवश्यकता हैं। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल और बड़ी मात्रा में सोना विदेशों से आयात करता है। ऐसे में जब वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतें बढ़ती हैं, तब इसका सीधा असर देश के विदेशी मुद्रा भंडार और व्यापार घाटे पर पड़ता है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री ने “स्मार्ट लाइफ स्टाइल” अपनाने का संदेश दिया है। यह किसी आर्थिक संकट की चेतावनी नहीं, बल्कि आने वाली चुनौतियों के प्रति समय रहते तैयार रहने की अपील है।

भारतीय संस्कृति में बचत को सदैव महत्व दिया गया है। “सादा जीवन उच्च विचार” की परंपरा हमारे सामाजिक जीवन का आधार रही है। गांवों में अनाज, घी और आवश्यक वस्तुओं का संग्रह तथा गृहिणियों द्वारा थोड़ी-थोड़ी बचत करके भविष्य सुरक्षित रखने की परंपरा भारतीय परिवार व्यवस्था की आर्थिक मजबूती का आधार रही है। हमारे बुजुर्ग हमेशा यही शिक्षा देते आए हैं कि आय से कम खर्च करना चाहिए और दिखावे से बचना चाहिए । यही कारण है कि भारतीय परिवारों में बच्चों को भी छोटी उम्र से गुल्लक में पैसे जमा करने की आदत सिखाई जाती रही है। वास्तव में बचत केवल धन जमा करने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और भविष्य की सुरक्षा का आधार है। जीवन में बीमारी, बेरोजगारी या आर्थिक संकट जैसी परिस्थितियां कभी भी आ सकती हैं। ऐसे समय में बचत ही सबसे बड़ा सहारा बनती है। “बूंद-बूंद से घड़ा भरता है” जैसी कहावतें इसी जीवन दर्शन को दर्शाती हैं।

प्रकृति भी हमें बचत और दूरदर्शिता का संदेश देती है। चींटियां अनुकूल समय में भोजन के छोटे-छोटे कण जमा करती हैं ताकि विपरीत परिस्थितियों में कठिनाई न हो। यही कारण है कि चींटी को अनुशासन, परिश्रम और बचत का प्रतीक माना जाता है। उसका जीवन हमें सिखाता है कि छोटी-छोटी बचतें ही आगे चलकर बड़ी ताकत बनती हैं। आज उपभोक्तावाद और दिखावे की संस्कृति के कारण बचत की आदत कमजोर होती जा रही है। लोग आवश्यकता से अधिक खर्च को आधुनिकता का प्रतीक मानने लगे हैं। जबकि सच्चाई यह है कि विवेकपूर्ण खर्च ही आर्थिक मजबूती का आधार होता है। प्रधानमंत्री द्वारा सार्वजनिक परिवहन, कारपूलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की सलाह भी इसी सोच का हिस्सा है। इलेक्ट्रिक वाहन न केवल पेट्रोल-डीजल की बचत करते हैं, बल्कि प्रदूषण कम कर पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वर्क फ्रॉम होम और हाइब्रिड मॉडल की उपयोगिता कोविड काल में पूरी दुनिया ने देखी। इससे ईंधन की बचत हुई, प्रदूषण कम हुआ और उत्पादकता में भी वृद्धि हुई। यदि बड़े संस्थान इस व्यवस्था को आंशिक रूप से अपनाते हैं, तो देश के स्तर पर ईंधन बचत का बड़ा परिणाम सामने आ सकता है। प्रधानमंत्री द्वारा विदेशी डेस्टिनेशन वेडिंग से बचने की सलाह भी महत्वपूर्ण है। भारत में राजस्थान, उत्तराखंड, गोवा, गुजरात, हिमाचल और कश्मीर जैसे अनेक सुंदर पर्यटन स्थल उपलब्ध हैं। यदि विवाह और अन्य आयोजन देश में ही होंगे, तो देश का पैसा देश में रहेगा और स्थानीय पर्यटन तथा रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

सोने की खरीद कम करने की सलाह भी आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयातक देशों में शामिल है। यदि लोग गैर-जरूरी सोना खरीदने के बजाय बैंक, म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार या उद्योगों में निवेश करें, तो इससे देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार दोनों को मजबूती मिलेगी। व्यापार घाटा कम होगा और रुपये की स्थिति भी बेहतर होगी। इसी प्रकार खाने में तेल का कम उपयोग केवल आर्थिक नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी दृष्टि से भी लाभकारी है। कम तेल वाला भोजन शरीर को स्वस्थ रखता है और आयातित खाद्य तेलों पर निर्भरता भी घटाता है। वहीं जैविक खाद और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने से रासायनिक खाद के आयात पर होने वाला खर्च कम किया जा सकता है।