डिजिटली कौशल पाठ्यक्रम से मिल रहे हैं बेशुमार रोजगार के अवसर: प्रधान

नई दिल्ली । केन्द्रीय शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने मंगलवार को कहा कि सदी की अगली तिमाही में जब भारत आजादी के 100 साल पूरे कर रहा होगा, तब सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगा। श्री प्रधान ने फ्यूचर स्किल्स फोरम में भारत के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में नामांकित छात्रों के लिए रोजगार कौशल पाठ्यक्रम के डिजिटल संस्करण का अनावरण किया और कहा कि डिजिटल भुगतान से लेकर टीकाकरण तक, हम जीवन के सभी क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी को अपनाने और श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ उत्पाद और सेवाएं बनाने में पहले से ही आगे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी के इस युग में जहां कार्यस्थल की प्रकृति तेजी से बदल रही है और नई विघटनकारी प्रौद्योगिकियां अब एक छोटे अभिजात वर्ग तक सीमित नहीं हैं, कौशल विकास हमारी जनसांख्यिकी की वास्तविक क्षमता को अनलॉक करने की कुंजी होगी। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि उद्योग जगत के नेता कुशल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के साथ-साथ भविष्य के लिए तैयार कार्यबल बनाने और समाज के बड़े लाभ के लिए एआई, आईओटी जैसी नई तकनीकों का लाभ उठाने के तरीकों पर विचार करने के लिए एक साथ आए हैं। इस अवसर पर अन्य वक्ताओं ने कहा कि किसी भी समय, कहीं भी सीखने की आवश्यकता को पूरा करने के उद्देश्य से, ये मॉड्यूल केन्द्र सरकार के भारत कौशल पोर्टल के साथ-साथ अन्य प्लेटफार्मों के माध्यम से 25 लाख शिक्षार्थियों के लिए सुलभ होंगे। सक्रिय उद्योग योगदान के साथ विकसित, पाठ्यक्रम में बाइट-साइज़, गेमिफाइड प्रारूप में 12 मॉड्यूल शामिल हैं और प्रत्येक पाठ के बाद मूल्यांकन किया जाता है। इससे शिक्षार्थियों को उनके सीखने की गहराई का आकलन करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। मॉड्यूल में कहानी सुनाने का तरीका शिक्षार्थियों को संबंधित परिदृश्य प्रदान करता है, जिसे वे वास्तविक दुनिया की स्थितियों में लागू कर सकते हैं।
क्वेस्ट एलायंस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आकाश सेठी ने बताया कि डिजिटल पाठ शिक्षार्थियों के लिए बेहद उपयोगी होंगे। उन्होंने कहा कि युवा प्रौद्योगिकी की ओर आकर्षित होते हैं, जो उन्हें कौशल सीखने और फिर से सीखने का स्थान प्रदान करती है। इसकी उन्हें भविष्य के लिए जरूरत होगी, इसलिए यह जरूरी है कि युवा आजीविका के साथ काम करने वाला कोई भी हितधारक इस बदलते परिदृश्य को समझे।