रसखान कबहूँ इन नैननि ते ब्रज के वन बाग तड़ाग निहारो

रसखान समाधि पर सांझी महोत्सव के दूसरे दिन भी आकर्षक सांझियों का चित्रण
दिल्ली के कलाकारों ने प्रस्तुत की “बनी ठनी” नाट्य लीला, दर्शक मोहित हुए

गोकुल/मथुरा। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद एवं जी.एल. ए विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्त्वावधान में महावन व गोकुल के मध्य स्थित महाकवि रसखान एवं ताज की समाधि स्थल पर अष्ट दिवसीय साँझी मेले का आयोजन के द्वितीय दिवस” बनी-ठनी नृत्य नाटिका” का मंचन किया गया जिसे देख स्थानीय लोगो के साथ बाहर से आये यात्री वाह वाह कर उठे।
रसखान साँझी महोत्सव के अंतर्गत रंग साँझी, फूलों की साँझी, जल के ऊपर साँझी व जल के नीचे साँझी के अतिरिक्त गोबर से साँझी का चित्रण किया गया। महोत्सव में साँझी कला पर केंद्रित चित्र प्रदर्शनी का भी प्रदर्शन ब्रज संस्कृति शोध संस्थान द्वारा किया जा रहा है। एक प्रदर्शनी राजकीय संग्रहालय की ओर से भी लगाई गई है। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत समाज गायन में साँझी के पदों का गायन किशोरी शरण के नेतृत्व में गायकों ने किया।
अब प्रथम बार भक्तकवि रसखान एवं ताज के समाधि परिसर में आयोजित होने वाले भव्य साँझी महोत्सव में संस्थान के साँझी कलाकार विश्वजीतदास, ब्रजगोपाल चित्रकार,मदन मोहन शर्मा,संजय सोनी ,कमलेश शर्मा व दीपाली कुलश्रेष्ठ अपनी कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के डिप्टी सीईओ पंकज वर्मा, उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डॉ उमेश चंद्र शर्मा, ब्रज संस्कृति शोध संस्थान के सचिव लक्ष्मी नारायण तिवारी गीता शोध संस्थान वृंदावन के शोध समन्वयक चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार ब्रज संस्कृति शोध संस्थान के प्रकाशन विभाग के अधिकारी गोपाल शरण तीर्थ विकास परिषद के अधिकारी आरपीएस यादव के अलावा तमाम कलाकार और अतिथि मौजूद रहे।
उप्र पर्यटन, वृन्दावन के श्रीगोदा विहार मन्दिर स्थित ब्रज संस्कृति शोध संस्थान एवं राजकीय संग्रहालय मथुरा का विशेष सहयोग इस अष्ट दिवसीय भव्य ‘साँझी महोत्सव’ में मिल रहा है।