ब्रज की धरोहर के रूप में डिजिटल लाइब्रेरी में सुरक्षित रहेंगे लोकगीत
वृंदावन। उ.प्र. ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने ब्रज लोक कला संरक्षण योजना के अन्तर्गत लोकगीत संग्रह कार्य प्रारंभ किया गया है। लोकगीत गायिकाओं की वीडियो और आडियो बनायी जा रही है जिन्हें ब्रज की एक धरोहर के रूप में डिजिटल लाइब्रेरी में सुरक्षित रखा जाएगा। भविष्य में ब्रज के इन लोकगीतों को सचित्र पुस्तक का रूप दिया जाएगा।
लोकगीत संग्रह की शुरुआत हरियाली तीज पर्व की पूर्व संध्या पर गांव नौहझील से हुई है। यहां ग्रामीण महिलाओं ने झूला झूलते हुए सावन के गीत (मल्हार) गाए जिसकी उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की टीम ने वीडियो रिकॉर्डिंग की।
इस संबंध में ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डॉ उमेश चंद्र शर्मा ने बताया है कि पहले दिन नौहझील की गायिकाओं ने चंदना, चंद्रावल और मल्हार गायन रिकार्ड कराया। उन्होंने बताया कि ब्रज के विभिन्न संस्कारों के लोकगीत, पुरातन कथाओं के आधार पर बनाए लोकगीतों के अलावा अलग-अलग तीज त्यौहारों पर गाये जाने वाले लोकगीत भी निकट भविष्य में रिकॉर्डिंग किए जाने हैं। इसके लिए ब्रज के जनपद मथुरा के अलावा हाथरस, आगरा, अलीगढ़ व भरतपुर आदि जिलों की वे महिलाएं उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद से संपर्क कर सकती हैं जो ब्रज भाषा में संपूर्ण लोकगीत को स्पष्ट उच्चारण में गाने की क्षमता रखती हैं। उनके गांव में परिषद की टीम स्वयं पहुंचेगी।महिलाओं के अलावा पुरुष लोकगीत गायक भी इस अभियान में सहयोग के लिए आगे आएं।
इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार के गीता शोध संस्थान वृंदावन की शोध समन्वयक डॉ रश्मि वर्मा से मोबाइल नंबर -8273753239 पर या गीता शोध संस्थान वृंदावन के समन्वयक चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार मोबाइल नंबर 9897935394 पर संपर्क स्थापित किया जा सकता है।
Sign in
Sign in
Recover your password.
A password will be e-mailed to you.