दिलीप यादव
मथुरा। जनपद की मांट विधानसभा सीट एक बार फिर चर्चा में हैं। सपा—भाजपा के टिकिट वितरण ने इस सीट को चर्चा का विषय बनाया दिया है। भाजपा ने यहां से राजेश चौधरी को टिकिट दिया है वहीं प्रबल दाबेदार एसके शर्मा पांच साल से पार्टी के निर्देश पर यहां बेस तैयार करने में लगे हैं। अब टिकिट कटते ही वह बागी हो गए हैं। इधर रालोद कोटे की सीट पर सपा के संजय लाठर के ताल ठोंकने से सपा—रालोद गठबंधन के दो केंडीडेट आमने सामने हैं। हर किसी की नजर इन दोनों सीटों पर होने वाले फेरबदल पर है। नामांकन तक इस सीट पर तीनों दलों का क्या निर्णय होगा यह सभी जानना चाहते हैं। यहां से आठ बार विधायक रहे श्याम सुन्दर शर्मा फिर मैदान में हैं। दूसरे दलों की नीति में उनका क्या दखल होगा लेकिन नामांकन से पूर्व ही इस सीट पर सभी दल पस्त नजर आ रहे है।
भगवान कृष्ण की जन्मभूमि में जमीन तलाश रही सामजवादी पार्टी का तिलस्म टिकिट वितरण से पूर्व ही बिखरा नजर आ रहा है। गठबंध में सपा कोटे की मुख्य मथुरा सीट से स्थानीय पदाधिकारी ओबीसी श्रेणी को दिलवाना चाहते थे लेकिन आला कमान ने हाथरस जनपद के देवेन्द्र अग्रवाल को मैदान में उतार दिया है। गठबंधन का मुख्य पेंच मांट सीट पर फंस गया है। यहां से रालोद ने योगेश नौहवार को अपना केंडीडेट घोषित किया। बाद में सपा मुखिया अखिलेश यादव के करीबी संजय लाठर ने भी दाबेदारी कर दी। अब मांट से गठबंधन का कौन सा एक प्रत्याशी लडेगा या फिर दोनों लड़ेंगे अथवा गठबंधन किसी तीसरे के नाम पर एक राय होकर इस झंझट को दूर करेगा यह देखने वाली बात है। दोनों प्रत्याशियों पर अपनी अपनी पार्टी के बी फ़ार्म मौजूद है।
गठबंधन का झंझट अन्य सीटों पर भी नाकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। मांट की सीट राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले श्याम सुंदर शर्मा के विजय रथ को रोकने की कवायद के लिहाज से भी हर दल के लिए अहम है और इस पर गठबंधन और भाजपा में हो रहा घमासान भी अहम है।
पूर्व विधानसभा चुनाव में पांच में से चार सीटों पर फतह हासिल करने वाली भारतीय जनता पार्टी के लिहाज से भी मांट सीट चर्चा में है। गठबंधन के दो जाट पहले से ही मैदान में हैं। भाजपा कोटे से टिकिट कटने से नाराज एसके शर्मा और उनके समर्थक बगावत पर उतर आए हैं। भाजपा में बागियों का हश्र बहुत अच्छा नहीं होता। उधर गोवर्धन क्षेत्र से विधायक कारिंदा सिंह का टिकिट कटने से उनके समर्थक भी नाराज हैं लेकिन मांट की सीट पर फंसा पेच कुछ न कुछ गुल जरूर खिलाएगा। गठबंधन और भाजपा यहां कोई फेरबदल करे न करे लेकिन यह सीट एक बार फिर सुर्खिायों में है। पार्टियों ने सही किया या गलत वह जानें लेकिन राजनीति के चाणक्य पंडित श्याम सुन्दर शर्मा फिर चर्चा में हैं और इस सीट से नौवी बार विधानसभा का चुनाव लडेंगे। सभी दलों के दांव नौवी बार भी खाली जाते नजर आ रहे हैं।
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