विकास प्राधिकरण की महायोजना पर आई आपत्तियों पर जन सुनवाई हुई तेज

मथुरा। मथुरा-वृन्दावन महायोजना 2031 को लागू करने को लेकर गुरूवार को भी प्राधिकरण सभागार में आपत्तियों पर सुनवाई जारी रही। प्राधिकरण उपाध्यक्ष नगेन्द्र प्रताप, नगर आयुक्त अनुनय झा, अपर नगर आयुक्त आगरा मंडल साहब सिंह, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) योगानंद पाण्डेय, अशोक कुमार एसो. टाउन प्लानर, एटीपी ऋचा कौशिक की टीम ने लोगों की आपत्ति-सुझाब सुने।
जन सुनवाई में कन्हैया लाल अग्रवाल ने छटीकरा पर सामुदायिक एरिया को आवासीय करने की मांग की। बरारी में पूर्व महायोजना में पुलिस लाइन के लिए आरक्षित क्षेत्र को खत्म करने का सुझाव आया। कहा गया कि पुलिस विभाग के लिए गनेशरा सहित कई स्थानों पर भूमि मौजूद है। अब इस क्षेत्र को पुलिस लाइन से हटाकर आबादी और व्यवसायिक घोषित किया जाये। अगन पुरा -बाद में औद्योगिक एरिया के लैंड यूज बदलने का सुझाव देते हुए बताया गया कि यहां कोई भी अभी तक 20 साल से उद्योग की स्थापना नही हुई है इसलिए इस क्षेत्र को आबादी कर दिया जाये।
कोसी नि. तरूण सेठ ने कहा कि मथुरा से कोसी तक हाईवे पर एक ही नियम लागू किया जाये, हाईवे के डिवाइडर से 32 मीटर की नाप निर्माण के लिए की जाये। इसके अलावा अजीजपुर कोसी में भारी उद्योग क्षेत्र को समाप्त कर व्यवसायिक कम आबादी किया जाये। भाजपा नेता संजय गोविल ने मांग की कि शहर के कृष्णापुरी चौराहा क्षेत्र को ’बाजार स्ट्रीट’ क्षेत्र घोषित किया जाना जरूरी है। जयसिंहपुरा क्षेत्र में पुराने जर्जर मैथोडिस्ट अस्पताल को सामुदायिक से हटाकर आबादी क्षेत्र किया जाना जरूरी है। 2012-13 से वहां कोई अस्पताल नही चल रहा। व्यापारी नेता मुरारी अग्रवाल ने सुझाव दिया कि छटीकरा से वृन्दावन तक सडक के दोनों ओर 300 मीटर गहराई तक प्रस्तावित निर्मित भवन की उॅंचाई को 11 मीटर से बढाकर 33 मीटर (पांच मंजिला) किया जाये क्योंकि सन् 2000 में ये सड़क विकसित नही हुई थी। इसके अलावा सुनरख बांगर एरिया की पूरी जमीन आवासीय है, उसमें 2 किलोमीटर अंदर तक कुछ भूमि क्षेत्र आश्रम मठ में इस महायोजना में प्रस्तावित किया गया है जो कि न्यायसंगत नही है। आश्रम मठ का क्लौज इससे हटना चाहिए। इसके अलावा गोवर्धन, छाता, वृन्दावन, बरसाना आदि क्षेत्र की आपत्तियों पर भी सुनवाई की गई।
एक दर्जन मामलों में टीम ने स्थलीय निरीक्षण के आदेश किए। महायोजना पर सुनवाई की कल 10 जून अंतिम तिथि है। अब तक करीब 200 मामलों पर सुनवाई की जा चुकी है।