मुख्यमन्त्री योगी के ट्वीट के बाद भी प्रशासन ने नही ली पीड़ित की सुध, पैसे पैसे को मोहताज है हरदोई का परिवार
मथुरा। सड़क दुर्घटना में एक ही परिवार के 7 लोगों की दर्दनाक मृत्यु पर दुख जताने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ट्वीट के बावजूद दुर्घटना में घायल दो सदस्यों की हालत नाजुक बनी हुई है परंतु जिला प्रशासन उनकी अभी तक कोई सुध नहीं ले पाया है जबकि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट आदेश दिया था कि इस मामले में सभी प्रकार के इलाज पर होने वाले व्यय सरकार करेगी। यमुना एक्सप्रेस-वे पर सड़क हादसे में घायल हुए श्रीगोपाल की हालत नाजुक बनी हुई है, तीन साल के कृष की हालत भी स्थिर है। चाचा और भतीजे का इलाज ग्रेटर नोएडा के शारदा हॉस्पिटल में चल रहा है। इलाज करा रहे श्रीगोपाल के बड़े भाई रामबाबू ने रोते हुए बताया कि पैसे खत्म हो गए हैं कैसे भाई और भतीजे का इलाज कराएं। प्रशासन की तरफ से कोई भी मदद नहीं मिल रही है।
बताते चले की यमुना एक्सप्रेस-वे पर 7 मई की सुबह थाना नौहझील के माइल स्टोन 68 के गांव नौशेरपुर पर किसी वाहन की टक्क्रर से वैगनआर कार सवार एक ही परिवार के सात लोगों की मौत हो गई थी। यह सभी हरदोई के संडीला थाना के गांव सुंदरपुर से नोएडा लौट रहे थे। इस हादसे में श्रीगोपाल और उनका तीन साल का भतीजा कृष भी घायल हुआ था। शनिवार देर रात दोनों को ग्रेटर नोएडा के शारदा हॉस्पिटल ले जाकर भर्ती कराया गया। यहां छोटे भाई और भतीजे की देखभाल कर रहे रामबाबू ने बातचीत में रोते हुए बताया कि पैसे खत्म हो गए हैं, तो कैसे इलाज कराएं। शासन कोई मदद नहीं कर रहा है तो प्रशासन से उम्मीद क्या करें। रामबाबू कहते हैं कि पूरा परिवार तो सड़क हादसे में खत्म हो चुका है, वह इन दोनों को बचाना चाहते हैं, पर बिना पैसे के इलाज संभव नहीं है। उनके पास पैसे का अभाव है। अगर कोई मदद मिले तो उनके छोटे भाई और भतीजे का इलाज हो जाए। श्रीगोपाल की टांग में फ्रेक्चर व कमर और रीढ़ की हड्डी में चोट है उनकी हालत नाजुक बनी हुई है, जबकि कृष की हालत स्थिर है। आर्थिक रूप से कमजोर इन दोनों को कोई भी मदद तक नहीं मिल पा रही है जिससे की उचित इलाज मिलने से यह सही होकर अपने घर आ सकें।
इस बड़े हादसे के बाद सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर हादसे पर दुख प्रकट किया था और घायलों को उचित इलाज देने की बात भी कही थी। मुख्यमंत्री के ट्वीट के बाद भी मथुरा जिला प्रशासन के किसी अधिकारी ने उन्हें उचित इलाज दिलाना तो दूर उनका हालचाल पूछने की जहमत तक नहीं उठाई।