8 नवंबर को मनेगी दीपावली , प्रदोष काल में शाम 5:38 से 7:48 बजे तक रहेगा महालक्ष्मी पूजन का विशेष मुहूर्त
महानिशीथ काल में भी होगी महालक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना, ज्योतिषाचार्य बंशीधर ने बताया दिन और रात्रि के पूजन का शुभ समय
दीपावली का पर्व इस बार 8 नवंबर 2026 रविवार को मनाया जाएगा। दीपों के इस महापर्व पर धन और वैभव की अधिष्ठात्री देवी महालक्ष्मी के पूजन के लिए विशेष मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं। ज्योतिषाचार्य पं. बंशीधर के अनुसार दीपावली केवल दीप जलाने और उत्सव मनाने का पर्व नहीं है बल्कि यह जीवन में नवीन चेतना और समृद्धि के संकल्प का भी अवसर है। इस दिन व्यापारी वर्ग सहित आमजन को शुभ मुहूर्त में महालक्ष्मी और भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार दीपावली पर प्रदोष काल और महानिशीथ काल में महालक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है। प्रदोष काल का पूजन मुहूर्त शाम 5 बजकर 38 मिनट से 7 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। वहीं महानिशीथ काल रात 11 बजकर 22 मिनट से 12 बजकर 12 मिनट तक बताया गया है। इस अवधि में श्रद्धालु विशेष संकल्प के साथ महालक्ष्मी की पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
दोपहर से शुरू होंगे दिन के पूजन के शुभ मुहूर्त
दीपावली के दिन 8 नवंबर को अमावस्या तिथि सुबह 11 बजकर 27 मिनट से प्रारंभ होगी। इसके बाद दिन में भी पूजन के लिए कई शुभ लग्न और चौघड़िया उपलब्ध रहेंगे। स्थिर कुंभ लग्न दोपहर 1 बजकर 21 मिनट से 2 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। इस दौरान शुभ चौघड़िया दोपहर 1 बजकर 38 मिनट से 3 बजकर 2 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषाचार्य के अनुसार यह समय व्यापारियों और कारोबारियों के लिए विशेष शुभ माना गया है। इस अवधि में कोल्ड स्टोर संचालक, कार्यालयों, ट्रांसपोर्ट कारोबारियों, मशीनरी व्यवसायियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट, वकीलों और प्रॉपर्टी डीलरों के लिए पूजन करना विशेष फलदायी रहेगा।
इसके बाद चर मेष लग्न शाम 4 बजकर 17 मिनट से 5 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में शुभ चौघड़िया शाम 5 बजकर 27 मिनट से 7 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषाचार्य के अनुसार शुभ चौघड़िया के साथ चर और स्थिर लग्न का संयोग पूजन के लिए अनुकूल रहेगा।
प्रदोष काल में गृहस्थ और नौकरीपेशा लोगों के लिए शुभ समय
प्रदोष काल में महालक्ष्मी पूजन के लिए द्विस्वभाव मिथुन लग्न शाम 7 बजकर 50 मिनट से रात 10 बजकर 5 मिनट तक रहेगा। इस दौरान अमृत चौघड़िया शाम 7 बजकर 4 मिनट से 8 बजकर 30 मिनट तक तथा चर चौघड़िया रात 8 बजकर 30 मिनट से 9 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषाचार्य के अनुसार यह समय घर-परिवार में रहने वाले लोगों के साथ नौकरीपेशा वर्ग और अधिकारियों सहित सभी लोगों के लिए पूजन की दृष्टि से शुभ है। साहित्यकारों और अध्यात्म से जुड़े लोगों के लिए भी इस अवधि में पूजा करना श्रेष्ठ रहेगा।
महानिशीथ काल में महालक्ष्मी के साथ गणेश-सरस्वती और कुबेर पूजन का महत्व
रात्रि के महानिशीथ काल में कर्क और सिंह दोनों लग्न रहेंगे। कर्क लग्न रात 12 बजकर 23 मिनट तक तथा सिंह लग्न रात 2 बजकर 35 मिनट तक रहने का उल्लेख किया गया है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार मान्यता है कि महानिशीथ काल में ही समुद्र मंथन से महालक्ष्मी प्रकट हुई थीं। इसलिए इस विशेष काल में महालक्ष्मी के साथ भगवान गणेश माता सरस्वती और भगवान कुबेर का पूजन करना श्रेष्ठ माना गया है। व्यापारियों के लिए नए बही-खातों का पूजन और आगामी वर्ष के कारोबार की मंगलकामना करने का भी विशेष महत्व है।
संकल्प के साथ करें विधि-विधान से पूजन
ज्योतिषाचार्य पं. बंशीधर ने बताया कि दीपावली पर यदि किसी कारणवश प्रदोष काल में पूजा की सुविधा उपलब्ध नहीं हो तो श्रद्धालु अपने अनुकूल शुभ लग्न और चौघड़िया में पूजन का संकल्प ले सकते हैं। इसके बाद सुविधा के अनुसार शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से पूजा संपन्न करनी चाहिए। दीपावली का पर्व श्रद्धा और विश्वास के साथ मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने तथा परिवार में सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करने का अवसर है।