मथुरा में चमेट ऐप के जरिए करोड़ों की अवैध कमाई का खुलासा, मास्टरमाइंड समेत तीन गिरफ्तार

फर्जी आईडी बनाकर पेड वीडियो कॉलिंग और ऑनलाइन सट्टेबाजी का खेल चलाने का आरोप, एसटीएफ और हाईवे पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में सात मोबाइल, बैंक दस्तावेज और कार बरामद

मथुरा । ऑनलाइन गेमिंग, वीडियो कॉलिंग और लाइव होस्टिंग ऐप चमेट (Chamet), जिसे अब चिलचैट के नाम से जाना जाता है, के माध्यम से कथित तौर पर अवैध वित्तीय गतिविधियां संचालित करने वाले गिरोह का उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और मथुरा की थाना हाईवे पुलिस ने पर्दाफाश किया है। संयुक्त टीम ने गिरोह के कथित मास्टरमाइंड प्रवीन कुमार उर्फ प्रकाश समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरोह पेड वीडियो कॉलिंग, फर्जी आईडी और ऑनलाइन सट्टेबाजी के जरिए रकम जुटाने के साथ उसे छिपाने के लिए भी अलग-अलग माध्यमों का इस्तेमाल कर रहा था।

पुलिस के मुताबिक, एसटीएफ मुख्यालय की साइबर टीम को काफी समय से इस गिरोह की गतिविधियों के संबंध में सूचनाएं मिल रही थीं। इसके बाद अपर पुलिस अधीक्षक विशाल विक्रम सिंह, एसटीएफ उत्तर प्रदेश के पर्यवेक्षण में एसटीएफ मुख्यालय लखनऊ और थाना हाईवे पुलिस की संयुक्त टीम ने रविवार, 11 अक्टूबर को सुबह करीब 4:50 बजे मोतीकुंज स्थित ए-22 में कार्रवाई की। यह कार्यालय अर्जुन दिवाकर का बताया गया है। यहां से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

लड़कियों के नाम पर फर्जी आईडी बनाकर चलाते थे गतिविधियां

पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ के अनुसार, गिरोह का कथित सरगना प्रवीन कुमार लड़कियों के नाम और तस्वीरों का इस्तेमाल करके ऐप पर फर्जी आईडी तैयार करता था। इसके बाद वेतन पर रखी गई महिला होस्ट के माध्यम से पेड वीडियो कॉलिंग और अश्लील सामग्री उपलब्ध कराने जैसी गतिविधियां संचालित कराई जाती थीं। पुलिस ने यह भी आरोप लगाया है कि गिरोह कलर प्रिडिक्शन, कार रेसिंग और लकी बॉल जैसे खेलों के जरिए ऑनलाइन सट्टेबाजी में संलिप्त था।

जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस का कहना है कि ऐप पर उपयोगकर्ताओं द्वारा खरीदे गए कॉइन्स, गिफ्टिंग और कॉलिंग से बड़ी रकम जुटाई जाती थी। इस धनराशि के लेनदेन को छिपाने के लिए कथित तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग के तरीके अपनाए जा रहे थे। पुलिस के अनुसार, फुलियाओ हॉन्गकॉन्ग लिमिटेड (Fuliao Hong Kong Limited) जैसी विदेशी संस्थाओं से अर्री पे (Arri Pay) और ई-पे (ePay) ऐप के माध्यम से गिरोह के सदस्यों तथा उससे जुड़ी महिलाओं के बैंक खातों में डॉलर के रूप में रकम भेजे जाने की जानकारी मिली है। इन वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है।

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से सात मोबाइल फोन, एक सीपीयू, तीन चेकबुक, एक बैंक पासबुक, एक आधार कार्ड और तीन डेबिट कार्ड बरामद किए हैं। इसके अलावा चमेट/चिलचैट ऐप से संबंधित साक्ष्यों के 58 स्क्रीनशॉट के प्रिंटआउट और यूपी 85 डीडी 9194 नंबर की एक कार भी बरामद की गई है। पुलिस इन इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और बैंक दस्तावेजों के आधार पर गिरोह की गतिविधियों तथा धन के लेनदेन की पड़ताल कर रही है।

गिरफ्तार आरोपियों में प्रवीन कुमार उर्फ प्रकाश (26 वर्ष), पुत्र प्रहलाद सिंह, निवासी ग्राम सिहोरा, थाना जमुनापार; विपिन कुमार (26 वर्ष), पुत्र रामवीर सिंह, निवासी प्रीती बिहार कॉलोनी, लक्ष्मीनगर, थाना जमुनापार; और अर्जुन दिवाकर (27 वर्ष), पुत्र स्वर्गीय बेनीराम, निवासी मकान नंबर 275, मालीपाड़ा, धौली प्याऊ, थाना हाईवे, मथुरा शामिल हैं।

थाना हाईवे में मुकदमा अपराध संख्या 990/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 112, 318(4), 319(2) और 3(5), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66डी/67 तथा ऑनलाइन गेमिंग से संबंधित अधिनियम की धाराओं 5, 6, 7 और 9 में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि आरोपियों के विरुद्ध आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है।

इस कार्रवाई में थाना हाईवे के प्रभारी निरीक्षक अरविन्द कुमार निर्वाल, एसटीएफ मुख्यालय लखनऊ के उपनिरीक्षक पंकज कुमार सिंह, मनोज सिंह, मिथलेश कुमार झा, थाना हाईवे के उपनिरीक्षक अनुज तोमर, एसटीएफ के मुख्य आरक्षी धर्मेन्द्र सिंह, रणविजय सिंह, दीपेन्द्र सिंह, दीपक सिसोदिया, चालक मुख्य आरक्षी सुरेश सिंह और थाना हाईवे के आरक्षी मोहित शर्मा शामिल रहे।

पुलिस अब बरामद मोबाइल फोन, डिजिटल साक्ष्यों और बैंक खातों के जरिए गिरोह के वित्तीय नेटवर्क तथा अन्य संभावित सदस्यों की भूमिका की जांच कर रही है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।