फीस के लिए स्कूल से निकाले गए चार बच्चों की पुकार पहुंची डीएम तक, अब पूरी पढ़ाई मुफ्त

कलेक्ट्रेट बुलाकर डीएम ने सौंपी स्कूल ड्रेस, बैग-किताबें और जरूरी सामान — एसडीएम छाता ने लिया बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी

मथुरा। फीस न भर पाने के कारण स्कूल से निकाले गए दिव्यांग दंपत्ति के चार बच्चों की पुकार आखिरकार प्रशासन तक पहुंच गई। हरिद्वार से कांवड़ लेकर निकले इन बच्चों की परेशानी से जुड़ी खबर सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने चारों बच्चों को कलेक्ट्रेट बुलाकर पढ़ाई का पूरा सामान उपलब्ध कराया और अब उनकी शिक्षा पूरी तरह मुफ्त कराने के निर्देश दिए हैं।

कोसीकलां के बठैन गेट स्थित बैंक कॉलोनी निवासी दिव्यांग दंपत्ति भरत सिंह और सुनीता के चार बच्चे साधना कक्षा 11वीं मुस्कान कक्षा 9वीं प्रेरणा कक्षा 3वीं और शिवम कक्षा 7वीं में पढ़ते हैं। आर्थिक परेशानी के चलते बच्चों की फीस जमा नहीं हो पा रही थी। मामला सामने आने के बाद जिलाधिकारी ने बच्चों को कलेक्ट्रेट बुलाकर उनकी समस्या सुनी और तत्काल मदद उपलब्ध कराई।

जिलाधिकारी ने चारों बच्चों को दो-दो सेट स्कूल ड्रेस एक-एक स्कूल बैग किताबों का पूरा सेट पेंसिल बॉक्स टिफिन बॉक्स जूते और मोजे दिए। इसके साथ ही बच्चों की पढ़ाई में आर्थिक परेशानी आड़े न आए इसके लिए आगे की फीस भी माफ कराने की व्यवस्था की गई।

एसडीएम छाता अखिलेश कुमार ने बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेने का निर्णय लिया। बड़ी बेटी साधना और छोटी बेटी प्रेरणा की फीस पहले से ही माफ थी। वहीं मुस्कान की 6800 रुपये और शिवम की 5500 रुपये बकाया फीस भी माफ करा दी गई है। जिलाधिकारी ने स्कूल प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भविष्य में भी इन बच्चों से किसी प्रकार की फीस नहीं ली जाएगी।

बच्चों के पिता भरत सिंह परचून की दुकान चलाते हैं जबकि मां सुनीता सिलाई का काम करती हैं। दोनों दिव्यांग हैं। परिवार को प्रदेश सरकार की दिव्यांग पेंशन योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी का लाभ भी मिल रहा है। आवास योजना के तहत एक लाख रुपये की पहली किस्त जारी हो चुकी है।

जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप जिले के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण और बाधा रहित शिक्षा उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। प्रशासन की इस पहल से चारों बच्चों और उनके परिवार को बड़ी राहत मिली है।